लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सवाल: उद्घाटन के 18 दिन बाद 84 जगह धंसने का दावा, ठेका देने को लेकर भी उठे सवाल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को औद्योगिक शहर कानपुर से जोड़ने वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्घाटन के महज 18 दिन बाद 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर 84 जगह सड़क धंसने और मरम्मत किए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर लेन पर 39 स्थानों पर पैचवर्क किया गया, जबकि लखनऊ लेन पर 45 जगह मरम्मत की गई। एक्सप्रेसवे के इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा सांसद के भाई की कंपनी को मिला था ठेका
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण का ठेका PNC इंफ्राटेक को मिला था, जिसका संबंध भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन से बताया गया है। कंपनी को 23 फरवरी 2022 को परियोजना का ठेका मिलने की बात कही गई है।
हालांकि, कंपनी को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में कंपनी पर नए टेंडरों में भाग लेने से प्रतिबंध लगाया गया था। कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर NHAI अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के आरोप भी लगे थे।
4700 करोड़ रुपये की लागत से बना एक्सप्रेसवे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। 13 जुलाई 2026 को इसका उद्घाटन किया गया था। इतनी बड़ी लागत और उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क में खामियां सामने आने से परियोजना की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
NHAI की कार्रवाई
रिपोर्ट के मुताबिक, NHAI ने निर्माण कंपनी को क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करने के निर्देश दिए हैं। मरम्मत पूरी होने तक संबंधित हिस्से पर टोल वसूली रोकने की बात भी सामने आई है। पैचवर्क को जल्दी सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
परियोजना से जुड़े परियोजना प्रबंधक, टीम लीडर और क्षेत्रीय इंजीनियर को हटाए जाने तथा दो साल के लिए केंद्रीय परियोजनाओं से प्रतिबंधित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
टोल को लेकर भी चर्चा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल 275 रुपये और दोनों तरफ का टोल 415 रुपये बताया गया है। ऐसे में यात्रियों के बीच सड़क की गुणवत्ता और टोल व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल, एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम जारी है और पूरे मामले में निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और जिम्मेदारी तय किए जाने को लेकर नजर बनी हुई है।
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