सर्बिया पहुंचे जेलेंस्की, पहली आधिकारिक यात्रा में वुसिच से मुलाकात, क्या बदलेगा रुख?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की शुक्रवार को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर सर्बिया पहुंचे। सर्बिया उन चुनिंदा यूरोपीय देशों में शामिल है, जिनके रूस के साथ अब भी करीबी संबंध हैं। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था।
जेलेंस्की ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर सर्बिया पहुंचने की पुष्टि की। इससे पहले सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिच के कार्यालय ने गुरुवार देर रात उनकी यात्रा की घोषणा की थी। जेलेंस्की ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को महत्वपूर्ण बातचीत होगी। इस दौरान वह राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिच और सर्बिया के प्रधानमंत्री ज्यूरो मैकुट से मुलाकात करेंगे।
किन मुद्दों पर होगी जेलेंस्की और वुसिच के बीच बातचीत?
जेलेंस्की के मुताबिक, बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, यूरोपीय संघ के साथ संबंधों और दोनों देशों के लोगों के हित में व्यावहारिक अवसर तलाशने पर चर्चा होगी। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा होंगे।
जेलेंस्की की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वुसिच रूस के साथ सर्बिया के पारंपरिक संबंधों और यूरोपीय संघ के साथ अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने के दबाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।
वुसिच ने यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार किया है। उन्होंने इसके लिए रूस और सर्बिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला दिया है।
क्या रूस से संबंधों के कारण सर्बिया की EU सदस्यता अटकी?
सर्बिया यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया में है, लेकिन मॉस्को के प्रति बेलग्रेड की नीतियों के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सर्बिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर है।
हालांकि बेलग्रेड ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है, लेकिन उसने यूक्रेन को सहायता दी है और हाल के समय में कीव के साथ अपने संपर्क भी बढ़ाए हैं। सर्बिया ने युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में मदद करने का भी वादा किया है।
रूस ने पिछले साल सर्बिया पर नाटो सदस्य देशों के जरिए यूक्रेन को हथियार निर्यात करने का आरोप लगाया था। रूस ने इसे 'पीठ में छुरा घोंपने' जैसा बताया था।
ऐसे में जेलेंस्की की सर्बिया यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। यह यात्रा सर्बिया की रूस और यूरोपीय संघ के बीच संतुलन साधने वाली विदेश नीति पर भी असर डाल सकती है।
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