कांवड़ पथ पर पुष्पवर्षा से सीएम ने पश्चिमी यूपी को साधा, कांवड़ियों पर चढ़ी सियासी समीकरणों की नई तासीर
मेरठ में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। शनिवार को हेलीकॉप्टर से करीब 20 मिनट तक हुई पुष्पवर्षा के दौरान सड़क पर भगवा रंग में नजर आ रहे हजारों कांवड़ियों में उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा को आस्था, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का महापर्व बताया।
मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख कांवड़ मार्ग पर योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी को धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव या राजनीति का कोई जिक्र नहीं किया।
पश्चिमी यूपी में कांवड़ यात्रा का बड़ा सामाजिक प्रभाव
हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले लाखों शिवभक्त मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से होकर गुजरते हैं। गांवों से लेकर शहरों तक कांवड़ यात्रा का व्यापक सामाजिक प्रभाव है।
मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा को जाति और क्षेत्र के भेद से ऊपर बताते हुए सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भक्ति, समर्पण, सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का अनुपम उदाहरण है।
कांवड़ियों के बीच पहुंचे सीएम
श्रावण मास की दशमी तिथि पर मेरठ पहुंचे मुख्यमंत्री ने दुल्हेड़ा चौकी के पास शिवभक्तों का अभिवादन किया और हेलीकॉप्टर से उन पर फूल बरसाए। इसके साथ ही उन्होंने कांवड़ पथ का हवाई निरीक्षण भी किया।
पुष्पवर्षा के दौरान कांवड़ियों में खासा उत्साह नजर आया और कई जगह 'योगी-योगी' के जयकारे गूंजते रहे। मुख्यमंत्री की ओर से कांवड़ यात्रा को दिए गए महत्व को सरकार की धार्मिक-सांस्कृतिक प्राथमिकताओं और पश्चिमी यूपी में प्रशासनिक सक्रियता के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आस्था के साथ सियासत की चर्चा
कांवड़ यात्रा पश्चिमी यूपी में केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक माना जाता है। ऐसे में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा, कांवड़ियों का अभिवादन और सामाजिक समरसता पर मुख्यमंत्री का जोर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, पुष्पवर्षा का घोषित उद्देश्य शिवभक्तों का स्वागत और उनकी आस्था का सम्मान करना था, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे पश्चिमी यूपी में सरकार की पहुंच और धार्मिक-सांस्कृतिक संदेश के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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