श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान, संतों ने राष्ट्रपति और CJI को भेजा चार सूत्रीय ज्ञापन
वृंदावन धाम स्थित श्री चित्रगुप्त पीठ में संतों और धर्माचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सर्वसम्मति से कारसेवा का ऐलान किया गया। इस दौरान संतों की ओर से राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन भी जारी किया गया।
ज्ञापन में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों और धार्मिक अधिकारों को लेकर चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। संतों ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों के समाधान का रास्ता खुल सकेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई की मांग
संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति से संबंधित सभी मुकदमों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन के आधार पर कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामलों की जल्द सुनवाई से लंबे समय से चल रहे विवाद पर शीघ्र निर्णय हो सकेगा।
माखन-मिश्री का भोग लगाने की अनुमति
ज्ञापन में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण को विधिवत माखन-मिश्री का भोग अर्पित करने की अनुमति देने की मांग भी की गई है। संतों ने इसे श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया है।
ASI सर्वे से रोक हटाने की मांग
संतों की चौथी प्रमुख मांग श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI सर्वे पर लगी रोक हटाने की है। उनका कहना है कि सर्वे से संबंधित स्थल के ऐतिहासिक तथ्यों और वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी।
यह ज्ञापन श्री चित्रगुप्त पीठ के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज और श्री चित्रगुप्त पीठ परिवार, वृंदावन धाम की ओर से जारी किया गया है। ज्ञापन में इन चारों मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपील करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कारसेवा के शंखनाद का उल्लेख किया गया है।
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