आतंक पीड़ित होने का नाटक कब तक? यूएन में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कहा- पहलगाम में धर्म पूछकर मारे गए लोग
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए उसके आतंकवाद से पीड़ित होने के दावों पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपायों पर चर्चा के दौरान भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि आतंकवाद को केवल घोषणाओं और बयानों से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए आतंकियों, उनके संगठनों, वित्तपोषकों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई जरूरी है।
रघु पुरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान एक ओर खुद को आतंकवाद का शिकार और उसके खिलाफ लड़ाई में अग्रणी देश बताता है, जबकि दूसरी ओर उस पर आतंकी संगठनों को समर्थन, सुरक्षित ठिकाने और संसाधन उपलब्ध कराने के आरोप लगते रहे हैं। भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब संबंधित देश आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई करें।
भारत ने अपने बयान में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का भी जिक्र किया। रघु पुरी ने आरोप लगाया कि मसूद अजहर के खिलाफ इनाम बढ़ाने जैसी घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं और आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने 9/11 के हमलों, 26/11 के मुंबई आतंकी हमले और पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय तथा जवाबदेही मिलने की आवश्यकता है।
पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि हमलावरों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछा था, राजनीतिक विचारधारा नहीं। भारत ने इस घटना को धार्मिक आधार पर निशाना बनाए जाने का उदाहरण बताते हुए पाकिस्तान के आतंकवाद और धार्मिक नफरत के खिलाफ दिए जाने वाले बयानों पर सवाल उठाए। हालांकि, पाकिस्तान पर लगाए गए आरोपों को भारत के आधिकारिक पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के दावों पर भी आपत्ति जताई। रघु पुरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान इस अभियान को लेकर भ्रामक जानकारी फैला रहा है और अपनी सैन्य कार्रवाई से संबंधित दावों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अलग तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दोनों देशों के बीच आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक मतभेद जारी हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने और आतंकियों को संरक्षण देने के आरोपों की गंभीरता से जांच करने की अपील की।
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