‘बुलियों की खुशामद कभी काम नहीं आती’: भारतीय आईटी कंपनियों पर अमेरिकी शिकंजे से भड़की कांग्रेस, सरकार को घेरा
नई दिल्ली। अमेरिका की ट्रंप सरकार ने भारत की कई प्रमुख आईटी कंपनियों समेत आठ बड़ी तकनीकी कंपनियों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े PERM कार्यक्रम से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस फैसले के दायरे में इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएलटेक, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों के कथित दुरुपयोग की जांच का हवाला दिया है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अमेरिकी फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दबाव बनाने वाले नेताओं को खुश करने की नीति से कोई फायदा नहीं होता। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका के प्रति नरम नीति भारतीय आईटी पेशेवरों के हितों की रक्षा करने में सफल नहीं रही है। पार्टी ने केंद्र सरकार से इस मामले में भारतीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
जयराम रमेश ने इस मुद्दे को भारत की डिजिटल भुगतान नीति से भी जोड़ा। उन्होंने यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से संबंधित फैसलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत की नीतियां घरेलू कंपनियों और डिजिटल भुगतान व्यवस्था के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने भारतीय कानूनों के तहत जवाब देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन एवं रोजगार की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। निलंबन के कारण संबंधित कंपनियां इस कार्यक्रम के तहत नए आवेदन दाखिल नहीं कर सकेंगी और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया। हालांकि, सरकार ने सभी कंपनियों के खिलाफ आरोपों के विस्तृत और अलग-अलग प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए हैं। उद्योग संगठन नैसकॉम ने कहा है कि भारतीय आईटी कंपनियां हाल के वर्षों में एच-1बी वीजा पर निर्भरता घटाने और अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियां बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
इस फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों के उन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जो अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने के लिए नियोक्ता के माध्यम से आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, PERM कार्यक्रम पर रोक का अर्थ अपने आप मौजूदा एच-1बी वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड रद्द होना नहीं है। इस घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और भारतीय आईटी क्षेत्र पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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