रतन टाटा की पुण्यतिथि: सीएम योगी-रेखा गुप्ता ने किया नमन; नमक से सेमीकंडक्टर तक कैसे बदली टाटा समूह की तस्वीर?
नई दिल्ली। दिग्गज उद्योगपति और पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने उनके जीवन को परिश्रम, सादगी, सेवा और मानवीय मूल्यों की मिसाल बताते हुए भारतीय उद्योग जगत और समाज कल्याण में उनके योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रतन टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उद्योग, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को साथ लेकर चलने वाली उनकी विरासत हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्टता के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्योग जगत की पहचान मजबूत की। अन्य नेताओं ने भी राष्ट्र निर्माण, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में उनके योगदान को याद किया।
रतन टाटा ने वर्ष 1991 में टाटा समूह की कमान संभाली और दिसंबर 2012 तक समूह के अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने भारतीय बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत की। वर्ष 2000 में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली, 2007 में स्टील कंपनी कोरस और 2008 में फोर्ड से जगुआर तथा लैंड रोवर का अधिग्रहण समूह के विस्तार के प्रमुख पड़ाव रहे। इन सौदों ने टाटा समूह को वैश्विक कारोबारी पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
आज टाटा समूह का कारोबार नमक और चाय से लेकर स्टील, वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन और वित्तीय सेवाओं तक फैला है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा मोटर्स, टाइटन, एयर इंडिया और जगुआर लैंड रोवर जैसी कंपनियां समूह की व्यापक कारोबारी मौजूदगी का हिस्सा हैं। अब समूह सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भी निवेश कर रहा है। इस तरह पारंपरिक उपभोक्ता उत्पादों से लेकर आधुनिक तकनीक तक समूह का विस्तार भारतीय उद्योग के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।
रतन टाटा की पहचान केवल एक सफल उद्योगपति के रूप में नहीं रही। वे अपनी सादगी, विनम्रता और परोपकार के लिए भी जाने जाते थे। टाटा ट्रस्ट से जुड़े प्रयासों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में लंबे समय से काम किया जाता रहा है। उनके नेतृत्व में कारोबारी सफलता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी विशेष महत्व मिला।
रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर 2024 को 86 वर्ष की आयु में हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारतीय उद्योग जगत में उनका योगदान केवल कारोबार के विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाजसेवा, मानवीय मूल्यों और जिम्मेदार नेतृत्व की भी एक विशिष्ट मिसाल छोड़ी।
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