कैसे बची कैप्टन स्मित की जान?: 'लगातार बह रहा था खून, होंठ भी पड़ गए थे नीले'; अब डॉक्टर ने खुद बताई हकीकत
फ्लाईदुबई की उड़ान में घायल हुए भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की जान बचाने में विमान में मौजूद एक दंत चिकित्सक की अहम भूमिका सामने आई है। जॉर्जियाई मूल के डॉ. शुता मुसाएव ने बताया कि उन्होंने करीब 45 मिनट तक घायल कैप्टन की स्थिति पर नजर रखी और उन्हें होश में रखने की कोशिश की।
डॉ. मुसाएव के मुताबिक, जब वह कैप्टन के पास पहुंचे तो उनके सिर और बाएं हाथ से काफी खून बह रहा था। उन्होंने पहले कपड़े की मदद से घावों पर दबाव बनाया, लेकिन रक्तस्राव जारी रहा। इसके बाद उन्होंने विमान के कर्मचारियों से बर्फ मंगाई और लगातार घावों पर दबाव बनाए रखा। उनका कहना है कि करीब 45 मिनट तक उन्होंने इसी तरह कैप्टन की हालत संभालने की कोशिश की।
कैप्टन को होश में रखने के लिए मुसाएव उनसे लगातार बातचीत करते रहे। उन्होंने उनके परिवार और बच्चों के बारे में पूछा तथा उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह सुरक्षित जमीन पर पहुंचेंगे। एक समय कैप्टन की नब्ज काफी कम हो गई, जिसके बाद मुसाएव ने उनकी स्थिति संभालने की कोशिश की। बाद में जब उनके होंठ नीले पड़ने लगे तो उन्होंने विमान कर्मचारियों से जल्द से जल्द लैंडिंग कराने को कहा।
कैप्टन दर्द कम करने के लिए दवा मांग रहे थे, लेकिन मुसाएव ने भारी रक्तस्राव और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें दवा देने से परहेज किया। उन्होंने थोड़ा पानी दिया और लगातार कैप्टन की नब्ज, होश की स्थिति और होंठों के रंग पर नजर रखी। उनका कहना था कि कैप्टन को अनावश्यक रूप से हिलाने से स्थिति बिगड़ सकती थी।
इस दौरान अन्य यात्रियों और विमान के चालक दल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यात्रियों ने कॉकपिट में स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की, जबकि अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला। विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारने के बाद कैप्टन को वहां मौजूद चिकित्सकों के हवाले कर दिया गया। बाद में भारतीय दूतावास की ओर से उनकी हालत में सुधार की जानकारी दी गई।
डॉ. मुसाएव ने इस पूरी घटना का श्रेय सिर्फ खुद को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि विमान में मौजूद कई यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने मिलकर हालात संभाले और सभी ने एक-दूसरे की मदद की। उनके मुताबिक, कैप्टन मच्छार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया और यात्रियों ने भी उन्हें बचाने में अपनी भूमिका निभाई।
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