हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सीएम सैनी के साथ बैठक में बनी सहमति
चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ बैठक के बाद समाप्त हो गई। सरकार की ओर से बिजली वितरण के निजीकरण नहीं होने का भरोसा दिए जाने के बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। कर्मचारियों ने काम पर लौटकर बिजली आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है और राज्य में बिजली क्षेत्र के निजीकरण का समर्थन नहीं करती। बैठक में तय हुआ कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के निजी कंपनी को दिए गए बिजली वितरण लाइसेंस के फैसले की समीक्षा कराने के लिए विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने आयोग को इस मामले पर पुनर्विचार करने और संबंधित आदेश को रद्द करने के लिए निर्देश देने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
दरअसल, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल का समानांतर वितरण लाइसेंस दिया था। इसी फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था। कर्मचारियों को आशंका थी कि निजी कंपनी के प्रवेश से सरकारी बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी और भविष्य में निजीकरण का रास्ता खुल सकता है।
हड़ताल के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। तकनीकी खराबियों को दूर करने में देरी के कारण लोगों को बिजली कटौती और पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आईं। हालात को देखते हुए सरकार ने कर्मचारियों के साथ बातचीत तेज की।
बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्य सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध किया है और अब कानूनी तथा नियामकीय प्रक्रिया के तहत इस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उन्होंने इस संबंध में पत्र पर हस्ताक्षर कर संबंधित विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों की अन्य मांगों पर चर्चा के लिए 3 नवंबर को दोपहर तीन बजे बैठक निर्धारित की गई है।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मिले आश्वासन के बाद हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। हालांकि, निजी कंपनी के लाइसेंस पर अंतिम निर्णय नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति से बिजली सेवाओं को सामान्य करने की उम्मीद है।
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