आंध्र प्रदेश में चुनावी हिंसा के आरोप: TDP नेताओं पर विपक्षी उम्मीदवारों के पर्चे छीनकर फाड़ने का आरोप, BJP गठबंधन भी विवादों में
अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने और उनके पर्चे छीनकर फाड़ने के आरोपों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ताओं पर कई जगहों पर उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कुछ मामलों में नामांकन पत्र चुनाव अधिकारियों के हाथों से छीनकर फाड़े गए, जबकि कुछ उम्मीदवारों से रास्ते में ही दस्तावेज छीन लिए गए।
विवाद के बीच श्री सत्य साईं जिले के पेनुकोंडा क्षेत्र का एक वीडियो भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो में टीडीपी नेता सुब्बा रेड्डी नामांकन अधिकारी के कक्ष में एक उम्मीदवार का पर्चा छीनकर फाड़ते दिखाई देते हैं। वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने के उद्देश्य से हुईं। कडप्पा, तिरुपति, चित्तूर और पलनाडु समेत अन्य क्षेत्रों से भी नामांकन में बाधा, धमकी और झड़पों की शिकायतें सामने आई हैं।
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उसके उम्मीदवारों को नामांकन केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी हुई। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से शिकायत कर प्रभावित क्षेत्रों में नामांकन का अतिरिक्त अवसर देने, उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया कराने और घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। पार्टी का कहना है कि नामांकन पत्र छीनने और फाड़ने जैसी घटनाएं चुनाव में समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं।
वहीं, सत्तारूढ़ टीडीपी, भाजपा और जन सेना के गठबंधन ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए हिंसा के लिए वाईएसआरसीपी को जिम्मेदार ठहराया है। गठबंधन की ओर से आरोप लगाया गया कि विपक्षी पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान तनाव पैदा किया। इस तरह दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच विवाद का निष्पक्ष निर्धारण निर्वाचन अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अदालत ने आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को नामांकन से वंचित किए जाने की शिकायतों की जांच करने और अंतिम उम्मीदवार सूची के प्रकाशन को टालने का निर्देश दिया। आयोग ने शिकायतों, जिला प्रशासन की रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के लिए शहरी स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रोक भी लगाई। इसके बाद आयोग ने कुछ प्रभावित निकायों में अतिरिक्त नामांकन अवसर देने के लिए संशोधित कार्यक्रम जारी किया।
इस विवाद ने आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता और उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष ने कथित रूप से नामांकन पत्र फाड़ने और उम्मीदवारों को रोकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने आरोपों से इनकार किया है। अब निर्वाचन आयोग की जांच और शिकायतों पर लिए जाने वाले फैसले से यह स्पष्ट होगा कि किन उम्मीदवारों को दोबारा नामांकन का अवसर मिलेगा और चुनाव प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)