मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत का आरोप, परिजनों ने डॉक्टर-स्टाफ पर लापरवाही और मामला दबाने का लगाया आरोप

Tuesday, August 18, 2026 - 17:20
Updated: 5 days ago
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मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत का आरोप, परिजनों ने डॉक्टर-स्टाफ पर लापरवाही और मामला दबाने का लगाया आरोप

जिला गुना के मधुसूदनगढ़ का सरकारी अस्पताल में पदस्थ कर्मचारियों की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है।

अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण तीन मासूम बच्चे आप अपनी मां के इंतजार में रोते हुए दिखाई दे रहे हैं, जब के पूर्व में भी मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल में सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति तड़प तड़प कर अपनी जान, इलाज नहीं मिलने के कारण गवा चुके हैं।

दरअसल पूरा मामला यह है कि मधुसूदनगढ़ के कोलारस गांव में रहने वाली मनसा मोगिया पति मुन्ना मोगिया ने बताया कि मेरी पत्नी की डिलीवरी सोनोग्राफी में दी गई दिनांक के मुताबिक 15, 9, 2026 को होना था पर महिला के 

दिनांक 01,8, 2026 को अचानक दर्द होने लगा, महिला के परिजन महिला को मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर पदस्थ डॉक्टर एवं नर्सो ने महिला के दर्द के दो इंजेक्शन लगा दिए,जिस महिला की डिलीवरी तो हो गई पर महिला की तबीयत बिगड़ गई, परिजनों के मुताबिक महिला की सरकारी अस्पताल में ही मौत हो गई थी और डॉक्टर और मौजूद स्टाफ द्वारा महिला के परिवार के लोगों से कहा जा रहा था कि महिला कोमा में चली गई है, और महिला के परिवार के लोगों से सफेद कागज पर अंगूठा लगवा लिया और आनंद-फानन में चुपचाप महिला को निजी बहाने से गुना रेफर कर दिया। यहां डॉक्टर ने भी महिला को देखकर कहा कि महिला की तो पहले ही मौत हो चुकी है। उधर डिलीवरी में हुई बच्ची की भी हालत नाजुक थी, जिसे देखते हुए गुना के अस्पताल में मासूम बच्ची को भर्ती कर लिए पर बच्ची की मां अब इस दुनिया में नहीं है। जबकि मनसा मोगिया के दो बच्चे पहले के हैं, जिनका रो-रो कर बुरा हाल है, वह बच्चों को समझने के लिए बच्चों की दादी बोल रही है। कि मम्मी गुना गई है जल्दी आ आ जाएगी। इस दर्दनाक वीडियो ने एक बार फिर मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल की पोल खोल दी है, क्योंकि मधुसूदनगढ़ अस्पताल अब भगवान भरोसे चल रही है, यहां डॉक्टर अपनी मनमानी करते दिखाई देते हैं और आए दिन मधुसुदनगढ़ सरकारी अस्पताल से इस तरह की खबरें हमें देखने को सुनने को मिलती रहती हैं। और मामले में अधिकारियों की मिली भगत के कारण कोई ठोस कार्रवाई मधुसूदनगढ़ सरकारी अस्पताल के डॉक्टर एवं स्टाफ पर नहीं हो पाती है।

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