8वां वेतन आयोग, 12 लाख तक टैक्स फ्री इनकम और GST सुधार: 2025 बना आर्थिक बदलावों का साल
नई दिल्ली (आरएनआई)। साल 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़े सुधारों का गवाह बनकर उभरा है। वैश्विक अनिश्चितताओं और सुस्त वैश्विक वृद्धि के बीच भारत सरकार ने घरेलू मांग को मजबूत करने और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए। नए इनकम टैक्स कानून से लेकर जीएसटी दरों में कटौती और 8वें वेतन आयोग की पहल तक, इन कदमों ने आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक पर गहरा असर डाला है।
इनकम टैक्स व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव
2025 की सबसे बड़ी आर्थिक घोषणा ‘नया इनकम टैक्स कानून, 2025’ रही, जिसके तहत 1961 के पुराने आयकर कानून को समाप्त कर एक नया और सरल कानून लाया गया। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, लेकिन इसकी रूपरेखा बजट 2025 में ही तय कर दी गई थी।
नई कर व्यवस्था के तहत सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स फ्री कर दिया है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है और उपभोग बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। नए स्लैब के अनुसार 4 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है, 4 से 8 लाख पर 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख पर 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख पर 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख पर 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख पर 25 प्रतिशत और 24 लाख से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लागू होगा।
हालांकि इस राहत का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ा है। 1 अप्रैल से 17 दिसंबर 2025 के बीच नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह की वृद्धि दर घटकर 6.37 प्रतिशत रह गई, जबकि कॉरपोरेट टैक्स में 10.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जीएसटी में बड़ी राहत, सैकड़ों वस्तुएं सस्ती
2025 में जीएसटी व्यवस्था में भी बड़े सुधार किए गए। 22 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के तहत करीब 375 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरें घटाई गईं। चार-स्तरीय टैक्स ढांचे को सरल बनाकर मुख्य रूप से दो स्लैब—5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत—में सीमित कर दिया गया। केवल तंबाकू और लग्जरी उत्पादों जैसे ‘सिन गुड्स’ पर 40 प्रतिशत की उच्च दर बरकरार रखी गई।
सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर उपकर लगाने के लिए नए कानून भी लाए गए। हालांकि दरों में कटौती का असर नवंबर 2025 में जीएसटी संग्रह पर दिखा, जब यह गिरकर 1.70 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो सालाना आधार पर केवल 0.7 प्रतिशत की वृद्धि थी। सरकार का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और इससे आगे चलकर मांग और खपत बढ़ेगी।
8वें वेतन आयोग की तैयारी
साल के अंत तक सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन की दिशा में ठोस कदम उठाए। बढ़ती महंगाई और लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच यह फैसला करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में इसकी सिफारिशें लागू होने पर वेतन और पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बाजार में मांग को भी बल मिलेगा।
बीमा और श्रम कानूनों में सुधार
2025 में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई। इससे विदेशी कंपनियों को भारत में पूरी हिस्सेदारी के साथ बीमा कारोबार शुरू करने का रास्ता खुल गया है।
साथ ही चार नए श्रम संहिताओं—वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा—को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया तेज की गई। इनका उद्देश्य कंपनियों के लिए अनुपालन आसान बनाना और श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
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