‘एक देश, एक चुनाव’ देश की अर्थव्यवस्था और बेहतर शासन के लिए जरूरी: बोले भाजपा नेता पीपी चौधरी
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और ‘एक देश, एक चुनाव’ पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष P. P. Chaudhary ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर डालते हैं, इसलिए एक साथ चुनाव कराना समय की मांग है।
गुजरात के Gandhinagar और Ahmedabad में पिछले तीन दिनों से ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर आयोजित बैठकों के बाद चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का विजन विकसित भारत के निर्माण से जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी प्रक्रिया के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है और कई क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है।
पीपी चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा सेवाएं, शासन व्यवस्था और औद्योगिक उत्पादन तक प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं में किसी तरह की रुकावट न आए और प्रशासन बिना बाधा के काम करता रहे।
आर्थिक पहलू पर उन्होंने दावा किया कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश की अर्थव्यवस्था को 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। उनका कहना था कि चुनावों में लगने वाले बड़े संसाधनों और प्रशासनिक खर्च को कम करने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।
चौधरी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना सामान्य प्रक्रिया थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में कांग्रेस सरकारों के दौरान कई राज्य विधानसभाओं को समय से पहले भंग किए जाने, राष्ट्रपति शासन लागू होने और आपातकाल जैसी परिस्थितियों के कारण चुनावी चक्र अलग-अलग हो गया। उन्होंने कहा कि आज फिर उसी पुरानी व्यवस्था को लागू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं ताकि शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से मजबूत बन सके।
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