यूपी के 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, बिना सूचना बढ़ाया गया लोड; लाखों सब्सिडी से बाहर
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। आरोप है कि पावर कॉर्पोरेशन ने बिना पूर्व सूचना करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड बढ़ा दिया, जिससे बड़ी संख्या में गरीब उपभोक्ता सब्सिडी योजना से बाहर हो गए हैं। इस मामले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आपत्ति जताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
परिषद के अनुसार, बढ़ाए गए लोड वाले उपभोक्ताओं में करीब 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हैं। इनमें से लगभग 25 प्रतिशत ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्हें पहले रियायती दर पर बिजली मिल रही थी। लोड बढ़ने के बाद उनकी सब्सिडी स्वतः समाप्त हो गई है।
इसका असर सीधे बिजली बिल पर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब उपभोक्ताओं को हर महीने औसतन 165 रुपये और शहरी गरीब उपभोक्ताओं को करीब 435 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह कदम विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश के विपरीत है। उनके अनुसार, नियमों के तहत यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन महीने तक स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का उपयोग करता है, तो पहले उसे सूचना देना और फिर लोड बढ़ाने की जानकारी भेजना अनिवार्य है। बिना सूचना स्वीकृत लोड बढ़ाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
परिषद ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में टैरिफ आदेश और नियामकीय प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से अधिकतम मांग (मैक्सिमम डिमांड) का जुर्माना भी वसूला जा रहा है, जबकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री लोकसभा में स्पष्ट कर चुके हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद ऐसा जुर्माना नहीं लिया जाएगा। इसके बावजूद जुर्माना वसूलने के साथ-साथ स्वीकृत लोड भी बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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