तमिलनाडु में सियासी घमासान, पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और भाई के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
तमिलनाडु में कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त और सरकार गिराने की साजिश के मामले में चेन्नई पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने डीएमके के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर. वी. अशोक कुमार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। मामला हाल ही में बनी टीवीके सरकार को अस्थिर करने के कथित प्रयास से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, करूर जिले स्थित सेंथिल बालाजी के पैतृक आवास पर समन भेजा गया है। दोनों भाइयों को 6 जुलाई को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में दोनों के नाम सामने आए हैं।
यह मामला 29 जून को टीवीके विधायक एन. इलैयाराजा की शिकायत के बाद सामने आया। विधायक ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने खुद को एक सर्वे एजेंसी का प्रमुख बताते हुए उनसे संपर्क किया और कथित तौर पर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ मतदान करने के बदले 35 करोड़ रुपये की पेशकश की। प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
अब तक पुलिस इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कथित मुख्य बिचौलिया थिरुनावुक्करसु और उसके सहयोगी नरेश तथा त्यागराजन शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार के निर्देश पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, सरकार को अस्थिर करने के लिए करीब 180 करोड़ रुपये की कथित योजना बनाई गई थी।
फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें करूर, तिरुचिरापल्ली, कोयंबटूर और बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
गिरफ्तारी की आशंका के बीच अशोक कुमार ने मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर झूठा फंसाया जा रहा है और जांच एजेंसियों के पास उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य नहीं है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। टीवीके ने डीएमके पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है, जबकि डीएमके ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध और बिना ठोस सबूत वाला मामला बताया है।
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