टीएमसी में दावेदारी की जंग निर्णायक मोड़ पर, चुनाव आयोग में आज जमा होंगे दस्तावेज
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर जारी विवाद अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को सोमवार शाम तक अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज, संगठनात्मक रिकॉर्ड और अन्य प्रमाण जमा करने का निर्देश दिया है। इसके बाद आयोग उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई करेगा।
पार्टी के 28 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है, जब दो गुट स्वयं को 'असली' तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। विवाद का केंद्र पार्टी का चुनाव चिह्न 'जोड़ा घास फूल', संगठनात्मक ढांचा, वित्तीय संसाधन और पार्टी मुख्यालय पर अधिकार है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुई आंतरिक कलह अब पार्टी पर नियंत्रण की खुली लड़ाई में बदल चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी समर्थक गुट की ओर से वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी नई दिल्ली पहुंचकर चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। दूसरी ओर, ऋतब्रत समर्थक गुट का दावा है कि उसे विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और इससे संबंधित दस्तावेज पहले ही आयोग को सौंपे जा चुके हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी की स्थापना, संगठन की निरंतरता और मूल नेतृत्व को अपने दावे का आधार बना रहा है। वहीं, बागी गुट का कहना है कि उसके पास निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का बहुमत है, इसलिए पार्टी पर वास्तविक अधिकार उसी का होना चाहिए।
विवाद की शुरुआत विधायक दल के भीतर मतभेद से हुई थी, लेकिन अब यह पूरे संगठन के नियंत्रण की लड़ाई बन चुकी है। हाल ही में बागी गुट ने विशेष बैठक आयोजित कर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना और समानांतर नेतृत्व की घोषणा की। इससे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन के दौरान भी बागी गुट ने अपनी ताकत दिखाते हुए ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन का दावा किया था।
अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां दोनों पक्ष अपने कानूनी और संवैधानिक तर्कों के आधार पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार का दावा पेश करेंगे।
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