जीवन की एक चूक तपस्या और प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला सकती है : मुनि श्री सुधासागर जी

Sunday, June 14, 2026 - 15:05
Updated: 2 months ago
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जीवन की एक चूक तपस्या और प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला सकती है : मुनि श्री सुधासागर जी

गुना (आरएनआई) मन, बचन, कर्म से स्वयं को इतना नियंत्रित कर लो कि जो करो, जो सोचो, जो बोलो सब पावन हो जाये। जीवन में एक चूक जिंदगीभर की तपस्या,इज्जत प्रतिष्ठा को धूल में मिला देती है। यह उदगार आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगत पूज्य मुनि पुगव श्री सुधासागर जी महाराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुयें व्यक्त किये है ।

मुनिश्री ने कहा अपने जीवन को इतना पवित्र बना लो कि जब आप पैरो से चलो तो धरती भी पवित्र हो जाए। जो बोलो वह वाणी पवित्र हो जाए, जहां जाओ वह रास्ता पवित्र हो जाए। महान आत्माएं जहां जाती है वह धरती भी पवित्र हो जाती है जैसे अयोध्या, जहां श्रीराम ने जन्म लिया वह नगरी अयोध्या पावन हो गयी है और आज हजारों साल के बाद भी अयोध्या का नाम सम्मान से लिया जाता है। श्री राम वनवास को गए जहां-जहां उनके पैर पड़े वहां की धरती भी पवन हो गयी जिन्होंने अपने पैरों से पत्थर को भी तार दिया। हम पावन नहीं बन सकते कोईबात नहीं लेकिन ऐसे नहीं बन जाना कि अपने संपर्क में आने वाले को भी आप गंदा कर दो। उन्होने कहा अपना व्यक्तित्व ऐसा बना लो जो आपके संपर्क में आने से दूसरों का सम्मान बढ़ जाये। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा आपने शादी की तो क्या आपकी पत्नी गर्भ महसूस करेगी कि मुझे ऐसा पति मिला जिससे मेरी इज्जत बढ़ गयी, ससुराल वाले बोल सकेंगे कि हमारा दामाद ऐसा मिला हमारी इज्जत बढ़ गयी है तो समझना तुम धन्य हो गए हो। जैसे श्रीराम, श्रीराम से शादी करके सीता या राजा जनक ही धन्य नहीं हुए थे पूरी की पूरी जनकपुरी ही धन्य हो गई थी। मुनिश्री ने कहा जो व्यक्ति दूसरों के गुणों को देखकर उसके समान गुणिवान बनना चाहता है तो गुणिजनों की प्रशंसा करो उनके साथ सत्संग करो तो उनके गुण आप में भी आ सकते है परंतु मनुष्य ऐसा नहीं करता है अमीर को अमीर और गुणवान को गुणवान बनाने की भावना बाला ही मनुष्य महान होता है जैसे हमारे आचार्य श्री उन्होंने मुझ जैसे अनगढ़ पत्थर को भी पूज्य बना दिया है। यदि आप भी धन्य होना चाहते हो तो वंदे तदगुणलब्धे की भावना रखना चाहिए। मुनिश्री ने कहा स्त्री पर्याय बुरी नहीं है एक बार प्रथमानुयोग के शास्त्र पढ़कर देख लो स्त्री पर्याय की महिमा, जहां स्त्रियों ने कितना सम्मान पाया है और अमर हो गई है। उन्होंने तीर्थंकर आदिनाथ की पुत्रियाँ ब्राह्मणी और सुंदरी के बारे में बताया कि जिनका कोई व्रत नहीं था और न ही वह व्रत के बारे में जानती थी। मात्र इतना था कि हमारे कारण हमारे पिताजी को दूसरे के सामने याचना करना पड़ेगा कि आप हमारी पुत्रियों से शादी कर लें ।मात्र याचना करना पड़ेगा सिर्फ इतना ही था और उन्होंने जीवन भर शादी नहीं करने का निर्णय ले लिया। हमारे कारण पिता को झुकना पड़ेगा,जिनके चरणों में सारा संसार झुकता है उन्हें हमारे कारण झुकना पड़ेगा और वह अमर हो गयी है। मुनि श्री ने कहा जीवन में एक चूक पूरा जीवन खराब कर सकती है जैसे रावण ने की थी। जैन धर्म कभी झूठ नहीं बोलता है जिसने जो मागा उसे वही मिला है रावण ने मागा उसे सोने की लंका मिली कर्म में कहा जो मिला है उसका गलत उपयोग किया तो कर्म ने कहा गलती हो गयी,उसे सजा भोगना पड़ा है। उन्होंने कहा कभी भी धर्म नहीं छोड़ना भीख मांगना पड़े तो मांग लेना, मजदूरी करना पड़े तो कर लेना परन्तु धर्म नहीं छोड़ना। मनुष्य जीवन सफल हो जाएगा।

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