छात्र आंदोलन पर बोलीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा: 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी जारी संघर्ष, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
23 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष और जेएनयू शोधार्थी नेहा बोरा छात्र आंदोलन में सक्रिय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य न होने के बावजूद वह आंदोलन और गिरफ्तार छात्रों के समर्थन में लगातार काम कर रही हैं।
नेहा बोरा ने बताया कि लंबे उपवास के कारण उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार वह मसालेदार भोजन व लाल मांस से परहेज कर रही हैं। इसके बावजूद उन्होंने आराम करने के बजाय छात्रों के बीच रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि भूख हड़ताल समाप्त होने के तुरंत बाद वह बिहार पहुंचीं, जहां प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार और घायल छात्रों से मुलाकात की। उनका दावा है कि 600 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया था और कई पर गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। उनके अनुसार छात्र संगठनों के लगातार दबाव के बाद ही कई छात्रों की रिहाई संभव हो सकी।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए नेहा बोरा ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई छात्र घायल हुए। उनके अनुसार कुछ छात्रों के हाथ-पैर टूटे, गर्दन और सीने पर गंभीर चोटें आईं, जबकि कुछ को पेलेट लगने से आंखों की रोशनी प्रभावित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बैरिकेडिंग और पुलिस कार्रवाई के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे भी फंस गए।
नेहा बोरा ने कहा कि पुलिस कार्रवाई से आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि और मजबूत हुआ। उनके अनुसार बड़ी संख्या में छात्र घायल होने के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होते रहे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के शरीर पर लगे जख्म आने वाली पीढ़ियों के लिए इस संघर्ष की गवाही देंगे।
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