मानसून सत्र: मनुस्मृति पर खरगे की टिप्पणी से राज्यसभा में हंगामा, बयान का हिस्सा रिकॉर्ड से हटाया गया
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विवाद बढ़ने के बाद उनकी टिप्पणी का एक हिस्सा सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया।
चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन घटनाओं के दौरान एजेंसियां क्या कर रही थीं। खरगे ने यह भी कहा कि शिक्षा किसी विशेष वर्ग का अधिकार नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में आरएसएस का प्रभाव बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा बजट बढ़ाने की भी मांग करते हुए कहा कि इसे सकल बजट का छह प्रतिशत किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान खरगे ने मनुस्मृति और पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए कुछ टिप्पणियां कीं, जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। उनकी टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और सत्तापक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खरगे के बयान की निंदा करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के नेता के पास अपने दावों के समर्थन में कोई प्रमाण है तो उन्हें सदन के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। नड्डा ने यह भी आग्रह किया कि भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को इस विषय पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
विवाद बढ़ने के बाद सभापति ने मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी के एक हिस्से को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी कुछ समय तक सदन में हंगामा जारी रहा।
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