स्वदेशी डीएससी A24 से बढ़ी नौसेना की ताकत, गहरे समुद्र में बचाव और गोताखोरी अभियानों को मिलेगा नया सहारा
भारतीय नौसेना के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। नौसेना का नया डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी A24) कोलकाता के टीटागढ़ शिपयार्ड में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। करीब 70 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से तैयार यह पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी, बचाव अभियान और पानी के भीतर तकनीकी कार्यों में अहम भूमिका निभाएगा।
डीएससी A24 का लोकार्पण नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुगली नदी में किया गया। इस दौरान कई वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
क्या है डीएससी A24 की खासियत?
डीएससी A24, डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना का पांचवां और अंतिम पोत है। इसे 'यार्ड 329' के नाम से भी जाना जाता है और इसका निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL) ने किया है। इस पोत में 70 प्रतिशत प्रमुख उपकरण भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित हैं, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूत करते हैं।
यह पोत नौसेना के गोताखोरों को गहरे समुद्र में सहायता प्रदान करेगा। इसके जरिए पानी के भीतर निरीक्षण, बचाव अभियान, मलबे की खोज और अन्य विशेष अभियानों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा। साथ ही तटीय सुरक्षा और समुद्री अभियानों की क्षमता भी बढ़ेगी।
डीएससी A24 की प्रमुख विशेषताएं
* डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना का पांचवां और अंतिम पोत।
* लगभग 70 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से निर्मित।
* कैटामरन (दो पतवार) डिजाइन, जिससे समुद्र में बेहतर संतुलन और स्थिरता मिलती है।
* पानी के भीतर संचालन के लिए आधुनिक डाइविंग और सपोर्ट सिस्टम से लैस।
* नौसेना की गोताखोरी, खोज एवं बचाव तथा तटीय सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
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