केरल-तमिलनाडु में परिसीमन को चुनावी मुद्दा बनाएगी कांग्रेस, जयराम रमेश ने भाजपा पर साधा निशाना
नई दिल्ली (आरएनआई)। दक्षिण भारत के राज्यों Kerala और Tamil Nadu में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह परिसीमन के मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाएगी। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल दक्षिणी राज्यों को संसदीय सीटों में संभावित कमी के जरिए “दंडित” नहीं किया जाना चाहिए।
पीटीआई को दिए साक्षात्कार में रमेश ने आरोप लगाया कि यदि जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होती है तो केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार, जिन राज्यों ने परिवार नियोजन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू कर कुल प्रजनन दर (टीएफआर) को 2.1 तक लाकर जनसंख्या स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए, उन्हें प्रतिनिधित्व में कमी के जरिए नुकसान नहीं होना चाहिए।
रमेश ने याद दिलाया कि केरल 1988 में 2.1 की कुल प्रजनन दर हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बना था। तमिलनाडु ने 1993 में यह लक्ष्य हासिल किया, इसके बाद अविभाजित आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने भी इसे प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में जिम्मेदारी दिखाने वाले राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कटौती के रूप में दंडित करना संघीय ढांचे की भावना के विपरीत होगा।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर वित्तीय संसाधनों के वितरण में भेदभाव का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व और वित्तीय न्याय दोनों ही मुद्दे आगामी चुनावों में भाजपा को घेरने के लिए उठाए जाएंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे सहकारी संघवाद की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में “टकरावात्मक संघवाद” अपनाते हैं, जिससे सत्ता का केंद्रीकरण होता है और राज्यों की भूमिका कमजोर होती है।
रमेश ने राज्यपालों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि गैर-भाजपा शासित राज्यों में पारित विधेयकों को लंबित रखने या राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने M. K. Stalin और Pinarayi Vijayan द्वारा भी जनगणना और परिसीमन को लेकर जताई गई चिंताओं का उल्लेख किया।
इसके साथ ही रमेश ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान लागू की गई मनरेगा योजना को सहकारी संघवाद का सफल उदाहरण बताया। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार ने नए विधायी प्रस्तावों के जरिए राज्यों और ग्राम पंचायतों की भूमिका सीमित करने की कोशिश की है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह दक्षिणी राज्यों में परिसीमन और वित्तीय अधिकारों के मुद्दे को चुनाव प्रचार के केंद्र में रखेगी।
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