हाई कोर्ट का सरकार को सुझाव: तिरुप्परनकुंद्रम में 5 लोगों को 15 मिनट की सांकेतिक पूजा की दी जाए अनुमति
मदुरै (आरएनआई)। तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम जलाने को लेकर जारी विवाद के बीच Madras High Court की मदुरै पीठ ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि दीपथून (दीप स्तंभ) के पास पांच लोगों को 15 मिनट की सांकेतिक पूजा करने की अनुमति दी जा सकती है। इन पांच व्यक्तियों के नाम अदालत स्वयं तय करेगी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कोई आदेश नहीं, बल्कि सुझाव है।
यह टिप्पणी अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि दीपथून पर कार्तिगई दीपम जलाने से संबंधित पुराने न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं किया गया। जस्टिस G. R. Swaminathan की पीठ ने कहा कि यदि सरकार पूर्व आदेशों का सम्मान करना चाहती है तो बिना दीप जलाए केवल प्रतीकात्मक पूजा की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान दीप प्रज्ज्वलन की अनुमति देने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के खनिज एवं खदान मंत्री S. Raghupathi के बयान पर भी टिप्पणी की। मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सरकार दीपथून पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति नहीं देगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामला विचाराधीन होने के बावजूद इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई, जो उचित नहीं है।
इससे पहले मदुरै के जिला कलेक्टर के. जे. प्रवीण कुमार ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि 1 दिसंबर 2025 को निषेधाज्ञा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई थी, न कि अदालत के आदेशों को रोकने के लिए। वहीं पुलिस ने भी कलेक्टर के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने केवल प्रशासनिक निर्देशों का पालन किया।
अदालत ने मंत्री के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली उप-याचिका को फिलहाल बंद कर दिया है, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसे दोबारा खोलने की बात कही गई है। मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को निर्धारित की गई है।
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