ओबीसी के राजनीतिक पिछड़ेपन का निष्पक्ष अध्ययन कर तैयार होंगी व्यापक संस्तुतियां: न्यायमूर्ति राम औतार सिंह
हरदोई, 06 जुलाई। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक पिछड़ेपन का निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं समकालीन अध्ययन करना है। प्रदेश के विभिन्न मंडलों में आयोजित की जा रही सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से सभी पक्षों की राय लेकर व्यापक और संतुलित संस्तुतियां तैयार की जाएंगी।
सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित स्वामी विवेकानन्द सभागार में आयोजित सार्वजनिक सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि आयोग को प्राप्त होने वाले सुझावों, तथ्यों एवं अनुभवों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उन्हें आयोग की अंतिम संस्तुतियों में उचित स्थान दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने ग्रामीण निकायों में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण व्यवस्था और राजनीतिक पिछड़ेपन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने सुझाव एवं तथ्य आयोग के समक्ष रखे। आयोग के सदस्यों ने सभी पक्षों को ध्यानपूर्वक सुना और निष्पक्ष अध्ययन का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य बृजेश कुमार (सेवानिवृत्त डीजे), संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त एडीजे), डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया (सेवानिवृत्त आईएएस) तथा एस.पी. सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस) ने आयोग की कार्यप्रणाली, अध्ययन के उद्देश्य और आगामी कार्ययोजना की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रेमावती, मुख्य विकास अधिकारी नेहा व्याडवाल, परियोजना निदेशक डीआरडीए अशोक कुमार मौर्य, जिला पंचायतराज अधिकारी श्रैया उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रदेशभर से प्राप्त सुझावों और तथ्यों के आधार पर तैयार की जाने वाली संस्तुतियां स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर महत्वपूर्ण आधार बनेंगी।
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