एसआरएमयू के मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय एफडीपी में एआई पर हुआ गहन मंथन

Sunday, July 13, 2025 - 17:22
Updated: 1 year ago
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एसआरएमयू के मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय एफडीपी में एआई पर हुआ गहन मंथन

लखनऊ/बाराबंकी, 13 जुलाई 2025: शिक्षकों और शोधकर्ताओं को एआई  के उपयोग से मीडिया शिक्षा को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन रविवार को हुआ। “रीइमेजिनिंग मीडिया एजुकेशन: द रोल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशनल प्रैक्टिसेस” विषयक इस एफडीपी में सातों दिन अलग-अलग सब-थीम के  माध्यम से एआई उपयोग के विविध आयामों पर गंभीर चर्चा हुई। 


विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियरिंग पंकज अग्रवाल, प्रो-चांसलर इंजीनियरिंग पूजा अग्रवाल, वाईस चांसलर प्रो. विकास मिश्रा, कुलसचिव प्रोफेसर नीरजा जिंदल के संरक्षण एवं  इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर रजाउर रहमान के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में बतौर वक्ता जनसंचार और न्यू मीडिया विभाग, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू से जुड़े प्रोफेसर परमवीर सिंह ने डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन थ्रू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: तकनीक, चुनौतियां और भविष्य के रुझान विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने व्याख्यान  में कहा कि "कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने डिजिटल कंटेंट निर्माण को पूरी तरह बदल दिया है। एआई उपकरण जैसे ऑटोमेटेड वीडियो एडिटिंग और टेक्स्ट-टू-स्पीच रचनात्मकता को बढ़ाते हैं और समय की बचत करते हैं। हालांकि, डेटा गोपनीयता और नैतिकता के मुद्दों को संबोधित करना जरूरी है। भविष्य में एआई और मानव रचनात्मकता का तालमेल डिजिटल मीडिया को और सशक्त बनाएगा। दूसरे दिन के कार्यक्रम में स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशंस, गलगोटियास यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराग पांडे ने बतौर वक्ता मीडिया अध्ययन में एआई-संचालित पाठ्यक्रम डिजाइन विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि एआई संचालित पाठ्यक्रम डिजाइन शिक्षकों को डेटा एनालिटिक्स और वैयक्तिकृत शिक्षण के माध्यम से छात्रों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद करता है। यह तकनीक शिक्षण को प्रभावी और उद्योग की मांगों के अनुरूप बनाती है।" तीसरे दिन के कार्यक्रम में वक्ता के रूप में जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, प्रयागराज से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अख्तर आलम जुड़े। उन्होंने मीडिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक उपयोग विषय पर दिए अपने व्याख्यान में कहा कि एआई ने समाचार निर्माण और दर्शक विश्लेषण में क्रांति ला दी है, लेकिन गलत सूचना और डीप फेक जैसे जोखिमों को देखते हुए इसका नैतिक उपयोग अनिवार्य है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।" चौथे दिन के कार्यक्रम में बतौर वक्ता जुड़े  कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग, जैन डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोइन हसन ने कहा कि एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग का संयोजन शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। यह शिक्षकों और छात्रों को वास्तविक समय में डेटा साझा करने और वैयक्तिकृत शिक्षण अनुभव प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी हो रही है।" वे एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपना व्याख्यान दे रहे थे. पाचवें दिन के कार्यक्रम की वक्ता सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर, मध्य प्रदेश के कंप्यूटर साइंस और एप्लिकेशंस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कविता साहू रहीं। उन्होंने एआई और मीडिया शोध: रुझान, उपकरण और तकनीक विषय पर अपने व्यख्यान में बताया कि एआई ने मीडिया शोध को सशक्त बनाया है। डेटा माइनिंग, सेंटिमेंट एनालिसिस और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग जैसे उपकरण शोधकर्ताओं को गहरी अंतर्दृष्टि और सटीक परिणाम प्रदान करते हैं, जिससे शोध की गुणवत्ता बढ़ रही है।" छठवें दिन के कार्यक्रम में बतौर वक्ता जुड़ी प्रबंधन और एप्लाइड साइंसेज विभाग, लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, ग्रेटर नोएडा की प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी कौशिक ने  शिक्षा उद्योग में एआई को अपनाना विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि एआई शिक्षा उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। ऑटोमेटेड ग्रेडिंग, वैयक्तिकृत शिक्षण और वर्चुअल असिस्टेंट जैसे उपकरण शिक्षकों का कार्यभार कम करते हैं और छात्रों के लिए सीखने को आकर्षक बनाते हैं।" एफ डी पी कार्यक्रम में सातवें और समापन सत्र के वक्ता स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, बीबीडी यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार रहे. उन्होंने पत्रकारिता और कंटेंट निर्माण में एआई विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि एआई पत्रकारिता में स्वचालित समाचार लेखन और डेटा-संचालित स्टोरीटेलिंग के लिए महत्वपूर्ण है। यह पत्रकारों को रचनात्मक और डेटा-आधारित सामग्री बनाने में मदद करता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता और नैतिकता का महत्व बना रहता है।"

इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम कन्वेनर  एवं मीडिया स्टडीज के हेड डॉ. प्रदीप कुमार, फैकल्टी मेम्बर डॉ. मिली सिंह, डॉ. अमित कुमार सिंह, संदीप सिंह, राहुल चतुर्वेदी एवं तकनीकी सहयोगी राहुल यादव, संतोष शर्मा के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभन्न संस्थानों के 410 शिक्षकों एवं शोधार्थियों में भाग लिया।

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