हरिद्वार में 18 दिन हरकी पैड़ी पर नहीं बहेगी गंगा की धारा, गंगनहर की मरम्मत से दिल्ली-NCR तक असर
हरिद्वार। ऊपरी गंगनहर की वार्षिक सफाई और मरम्मत के चलते हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर गंगा के जलप्रवाह पर असर पड़ा है। मंगलवार, 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से नहर बंद किए जाने के बाद अब 7 नवंबर की मध्यरात्रि तक जलप्रवाह बंद रहेगा। ऐसे में हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से हर साल गंगनहर की सफाई और मरम्मत के लिए यह बंदी की जाती है। इस बार नहर बंद रहने की अवधि में मरम्मत के साथ घाटों के सुधार और आगामी अर्धकुंभ से जुड़े कुछ कार्य भी किए जाने हैं। अधिकारियों के अनुसार, नहर में पानी 7 नवंबर की मध्यरात्रि को दोबारा छोड़े जाने की योजना है, जिसके बाद 8 नवंबर से जलप्रवाह सामान्य होने की उम्मीद है।
हरकी पैड़ी पर गंगा का प्रवाह प्रभावित होने से धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर असर पड़ सकता है। इससे आसपास के दुकानदारों, तीर्थ-पुरोहितों और अन्य कारोबारियों को भी नुकसान की आशंका है। श्रद्धालुओं को हरिद्वार आने से पहले स्थानीय प्रशासन से ताजा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।
गंगनहर बंद होने का असर केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई और जल प्रबंधन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर सहित नहर से जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों को पहले से तैयारी करनी होगी।
गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान मरम्मत और सफाई का काम पूरा करने के बाद जलप्रवाह फिर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर पानी की उपलब्धता तथा स्नान की स्थिति को लेकर श्रद्धालुओं को प्रशासन की ओर से जारी ताजा निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए।
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