जंतर-मंतर पर जाने को लेकर हाईकोर्ट की रांका-दास से सवाल, नेहा बोरा की याचिका पर भी सुनवाई
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया जा चुका था, तो दोनों नेता वहां गए ही क्यों? अदालत ने उनकी हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सवाल उठाए।
सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से 19 अक्टूबर को उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि वे बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में दाखिल हुए और इस दौरान पुलिसकर्मियों के काम में बाधा पहुंचाई। सीजेपी की ओर से मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिकाकर्ताओं के वकील से पूछा कि जब जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं रखा गया था, तो वहां जाने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। सुनवाई में याचिका वापस लेने के विकल्प पर भी चर्चा हुई।
इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर भी सुनवाई की गई। उनकी याचिका दिल्ली पुलिस की ओर से 17 अक्टूबर को जारी उस नोटिस को चुनौती देती है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने के संबंध में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने को कहा गया था।
नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को सीजेपी के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जाते समय एहतियातन हिरासत में लिया गया था और अगले दिन रिहा कर दिया गया। उनकी याचिका में पुलिस के नोटिस को चुनौती दी गई है।
यह मामला जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत तथा नेहा बोरा के खिलाफ जारी नोटिस पर हाईकोर्ट की कार्यवाही के आगे बढ़ने के साथ मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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