हरियाणा: बिजली विभाग के निजीकरण पर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने उठाए सवाल, कर्मचारियों की हड़ताल का किया समर्थन
चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बिजली वितरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की जिम्मेदारी ऐसी कंपनी को देने का आधार क्या है, जिसके गठन को अभी लगभग एक वर्ष ही हुआ बताया जा रहा है।
विधायक ने कंपनी के अनुभव और तकनीकी क्षमता को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिजली वितरण का काम केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए मजबूत नेटवर्क, प्रशिक्षित कर्मचारी, तकनीकी संसाधन और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में पारदर्शिता बरतने और कर्मचारियों तथा आम उपभोक्ताओं की चिंताओं का जवाब देने की मांग की।
यह विवाद गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने के बाद तेज हुआ है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने कंपनी को 25 वर्ष का लाइसेंस देने का फैसला किया है। इसके तहत संबंधित क्षेत्रों में सरकारी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के साथ निजी कंपनी भी बिजली वितरण कर सकेगी।
कंपनी की क्षमता को लेकर बिजली कर्मचारी संगठनों और इंजीनियरों ने पहले भी आपत्तियां उठाई थीं। उनका कहना है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे क्षेत्रों से सरकारी बिजली निगम को मिलने वाला राजस्व सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि निजी कंपनी मुख्य रूप से अधिक लाभ देने वाले उपभोक्ताओं को सेवाएं देती है, तो सरकारी निगम की आर्थिक स्थिति और किसानों तथा कम आय वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये कर्मचारी संगठनों की आशंकाएं हैं, जिनके वास्तविक प्रभाव का आकलन लागू व्यवस्था और उसके परिणामों से होगा।
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे ने इस फैसले के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारी संगठन लाइसेंस रद्द करने और बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भूमिका पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच हरियाणा सरकार ने भी एचईआरसी के फैसले को चुनौती देने का ऐलान किया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज के मुताबिक, सरकार बिजली वितरण लाइसेंस के आदेश के खिलाफ अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करेगी और उस पर रोक लगाने की मांग भी करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील करते हुए कहा है कि सरकार उनके हितों के साथ खड़ी है।
अब इस मामले में सरकार की प्रस्तावित कानूनी चुनौती और कर्मचारियों के आंदोलन पर सबकी नजर है। विवाद का केंद्र यह है कि निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति से सेवा की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेगा, साथ ही सरकारी बिजली निगम, कर्मचारियों और किसानों के हितों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
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