हरिद्वार की हर की पौड़ी पर गंगाजल का संकट, सूने पड़े घाट
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार की पहचान माने जाने वाली हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर गंगा का जलस्तर बेहद कम हो गया है। गंगा स्नान और आचमन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंगाजल के अभाव में घाटों का नजारा बदला हुआ है और श्रद्धालु निराश होकर लौट रहे हैं।

दरअसल, ऊपरी गंगनहर की वार्षिक सफाई और मरम्मत के चलते 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से जल प्रवाह रोक दिया गया है। यह बंदी करीब 18 दिनों तक जारी रहने वाली है। अधिकारियों के अनुसार, नहर में जल प्रवाह 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद दोबारा शुरू किए जाने की योजना है। मरम्मत के साथ आगामी कुंभ की तैयारियों से जुड़े कुछ कार्य भी किए जा रहे हैं।

गंगा का जलस्तर घटने से हर की पौड़ी पर स्नान, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं को कठिनाई हो रही है। कुछ श्रद्धालु सीमित पानी से ही आचमन और धार्मिक क्रियाएं करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय कारोबारियों को भी आशंका है कि घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या घटने से उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।

हर की पौड़ी पर गंगाजल की उपलब्धता बनाए रखने को लेकर स्थानीय स्तर पर मांग भी उठी है। अधिकारियों के सामने चुनौती है कि मरम्मत कार्य के दौरान भी श्रद्धालुओं की धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक जल उपलब्ध कराया जाए। गंगा की धारा दोबारा सामान्य होने तक हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान की स्थिति की जानकारी लेकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
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