जर्जर अंडरपास पर चेतावनी लिखने से उठे सवाल, सुनील आचार्य ने रेल प्रशासन से मांगा जवाब
गुना रेलवे स्टेशन के ई.एन. कार्यालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित अंडरपास की जर्जर हालत को लेकर राहगीरों ने चिंता जताई है। श्रीराम कॉलोनी सहित आसपास की दर्जनों कॉलोनियों को जोड़ने वाले इस मार्ग का वर्षों से स्थानीय नागरिक आवागमन के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। वर्तमान में सड़क पर गहरे गड्ढे, अंडरपास की छत से पानी का रिसाव तथा जगह-जगह बाहर निकले सरिये राहगीरों के लिए खतरे का कारण बने हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों की शिकायत पर सामाजिक कार्यकर्ता सुनील आचार्य ने रेल प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करते हुए अंडरपास के जीर्णोद्धार की मांग की। इसके बाद रेल मंडल प्रबंधन की ओर से उन्हें अंडरपास के प्रवेश द्वार का एक छायाचित्र भेजा गया, जिसमें चेतावनी लिखी दिखाई दे रही है—“सतर्क! यह जल मार्ग है, आने-जाने का मार्ग नहीं।
इस चेतावनी को लेकर सुनील आचार्य ने रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि यह मार्ग वास्तव में केवल जल निकासी के लिए है और आवागमन के लिए नहीं, तो वर्षों से यहां सड़क निर्माण क्यों कराया गया और नागरिकों को इस रास्ते से आने-जाने दिया जाता रहा?
आचार्य ने यह भी सवाल उठाया कि लगभग वर्ष 2019 के आसपास ई.एन. अधिकारी द्वारा इसी मार्ग पर लाखों रुपये की लागत से कंक्रीट की सड़क बनवाई गई थी। यदि अंडरपास को अब जलमार्ग बताया जा रहा है, तो उस सड़क के निर्माण पर सार्वजनिक धन क्यों खर्च किया गया? साथ ही अंडरपास के समीप अलग से कंक्रीट की दीवार बनाकर जल निकासी की व्यवस्था किए जाने के औचित्य पर भी उन्होंने प्रश्न उठाया है।
उनका आरोप है कि शिकायत सामने आने के बाद अंडरपास के प्रवेश द्वार पर चेतावनी अंकित कर दी गई, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि जर्जर व्यवस्था को सुधारने के बजाय उसकी जिम्मेदारी राहगीरों पर डालने का प्रयास किया जा रहा है। आचार्य का कहना है कि किसी सार्वजनिक मार्ग को केवल चेतावनी लिखकर सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता। यदि संरचना असुरक्षित है तो उसे दुरुस्त करना या पूरी तरह बंद कर सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना रेल प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंडरपास की वर्तमान स्थिति गंभीर है। छत से कई स्थानों पर सरिये बाहर निकल आए हैं, पानी टपक रहा है और सड़क पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुनील आचार्य ने रेल प्रशासन से अंडरपास का तत्काल तकनीकी एवं संरचनात्मक निरीक्षण कराने, पूर्व में कराए गए निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की समीक्षा करने तथा स्थिति के अनुरूप स्थायी समाधान करने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही समाप्त किया जाए। जनता के धन से बने निर्माण की उपयोगिता, रखरखाव और सुरक्षा का जवाब भी जनता को मिलना चाहिए।”
अब देखना यह है कि रेल प्रशासन इस अंडरपास की जर्जर स्थिति को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है और वर्षों से इस मार्ग का उपयोग कर रहे नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा कब मिलती है।
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