'हमारे जंतर-मंतर से दूर रहें': दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी पर CJP ने जताई आपत्ति, प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज
दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अदालत की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि जंतर-मंतर आम नागरिकों और युवाओं के लिए अपनी आवाज उठाने का महत्वपूर्ण मंच है और इसे खत्म करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
मामला 'ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी' की याचिका से जुड़ा है। संगठन 10 अगस्त को जंतर-मंतर पर तीन घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहता है। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि शहर के बीचों-बीच इस तरह के प्रदर्शन नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे दिल्ली के लोगों को असुविधा हो सकती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की अनुमति को लेकर अंतिम फैसला सरकार और पुलिस को करना है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर शांतिपूर्ण विरोध के लिए नागरिकों के पास बचे प्रमुख स्थानों में से एक है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी तो क्या सरकार इंडिया गेट को शांतिपूर्ण विरोध के लिए जगह बनाएगी।
CJP ने दावा किया कि संगठन ने हाल ही में नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था। पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से प्रतिबंध का हवाला देते हुए CJP का कहना है कि जंतर-मंतर को भी प्रदर्शन के लिए सीमित करने से आम नागरिकों के लिए अपनी मांगें उठाने का विकल्प और कम हो जाएगा। वहीं, अदालत की टिप्पणी में प्रदर्शन के अधिकार के साथ-साथ राजधानी में यातायात और आम लोगों की सुविधा का सवाल भी सामने आया है।
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