सागर नगर निगम में एल्डरमैन जुगल प्रजापति की शपथ पर उठे सवाल, एफआईआर के बावजूद नियुक्ति को लेकर विवाद
सागर/भोपाल। सागर नगर निगम में नवनियुक्त एल्डरमैन जुगल प्रजापति की प्रस्तावित शपथ को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या लंबित आपराधिक मामले के बावजूद किसी व्यक्ति को नगरीय निकाय में नामित सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है।
मध्य प्रदेश शासन ने जुलाई 2026 में सागर नगर निगम के लिए आठ एल्डरमैन नियुक्त किए थे, जिनमें जुगल प्रजापति का नाम भी शामिल है।
बताया जा रहा है कि जुगल प्रजापति के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर निगम प्रशासन की ओर से कलेक्टर को पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस पत्र और उसमें दर्ज आपत्तियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और मामला अदालत में लंबित होना अपने आप में उसकी शपथ या नियुक्ति पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त है या नहीं। इसका स्पष्ट जवाब संबंधित कानून, नियुक्ति की अधिसूचना और मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
वहीं, आरोप लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक दबाव के चलते कलेक्टर और नगर निगम प्रशासन जुगल प्रजापति को शपथ दिलाने की तैयारी में हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में शपथ से पहले प्रशासन की ओर से उनकी पात्रता और लंबित प्रकरण की स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
गौरतलब है कि सागर नगर निगम में कुल आठ एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। नियुक्ति का आदेश मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 9 के तहत जारी किया गया था।
अ पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जुगल प्रजापति के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण का उनकी नामित पार्षद के रूप में शपथ और सदस्यता की वैधता पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ता है। प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
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