ब्रिक्स डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर सियासत तेज, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने केंद्र पर साधा निशाना
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित रात्रिभोज के शाकाहारी मेन्यू को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक और खान-पान की विविधता को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन परंपरा में मांसाहारी और समुद्री भोजन भी शामिल हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कार्ति चिदंबरम ने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है और यहां अलग-अलग क्षेत्रों तथा समुदायों की खान-पान की परंपराएं अलग हैं। उनके अनुसार, यदि किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत की भोजन संस्कृति को प्रस्तुत किया जा रहा है तो उसमें इस विविधता की झलक दिखाई देनी चाहिए।
शाकाहारी मेन्यू को लेकर उठे विवाद पर चिदंबरम ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के तरीके में एक खास सांस्कृतिक दृष्टिकोण दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सरकार की राजनीतिक विचारधारा का असर भारत की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करने के तरीके पर भी पड़ रहा है।
चिदंबरम ने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे एक खास सामाजिक और सांस्कृतिक समूह की राजनीतिक पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान को केवल एक विशेष खान-पान या सांस्कृतिक परंपरा तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में भारतीय मांसाहारी भोजन करते हैं। चिदंबरम के मुताबिक, यदि भारत की खान-पान की वास्तविक विविधता को दुनिया के सामने रखना है तो मांस और समुद्री भोजन को भी उसमें स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं, उनके लिए शाकाहारी विकल्प उपलब्ध रह सकते हैं, लेकिन भारतीय भोजन की पूरी विविधता दिखाने के लिए अलग-अलग तरह के व्यंजनों को शामिल किया जाना चाहिए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज में परोसे गए शाकाहारी व्यंजनों को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। कांग्रेस की ओर से इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि मेन्यू को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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