₹22 हजार करोड़ के कर्ज पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान, NCLT ने सुभाष चंद्रा की रीपेमेंट योजना को दी मंजूरी

Thursday, August 27, 2026 - 17:32
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₹22 हजार करोड़ के कर्ज पर सिर्फ ₹6.5 करोड़ का भुगतान, NCLT ने सुभाष चंद्रा की रीपेमेंट योजना को दी मंजूरी

सुभाष चंद्रा के पर्सनल इंसॉल्वेंसी मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने जी ग्रुप (Zee Group) के संस्थापक सुभाष चंद्रा के करीब ₹22,006.57 करोड़ के कुल कर्ज को महज ₹6.5 करोड़ में रफा-दफा करने वाले रीपेमेंट प्लान को अपनी मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद कर्ज देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने बकाया पैसे का 99.97% हिस्सा गंवाना पड़ेगा, जिसे बैंकिंग भाषा में 'भारी हेयरकट' कहा जा रहा है.

तीसरे जज के फैसले से सुलझा विवाद

इस मामले पर फैसला सुनाते हुए NCLT के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्ट्सी कोड (IBC) की धारा 114 के तहत इस सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दी. दरअसल, इससे पहले NCLT की दो सदस्यीय बेंच के बीच इस प्लान को लेकर मतभेद था और दोनों जजों की राय अलग-अलग थी. इस गतिरोध को दूर करने के लिए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन ने नीलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया, जिन्होंने बहुमत के आधार पर इस प्लान के पक्ष में फैसला सुनाया.

LIC हाउसिंग फाइनेंस और अन्य बैंकों का विरोध

एलआईसी (LIC) हाउसिंग फाइनेंस की अगुवाई में कई बड़े बैंकों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया था. बैंकों का कहना था कि ₹22,006.57 करोड़ के भारी-भरकम कर्ज के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ देना पूरी तरह से अव्यावहारिक और गलत है.

आंकड़ों के मुताबिक, इस ₹6.5 करोड़ में से ₹6.25 करोड़ सभी बैंकों के बीच उनके कर्ज के अनुपात में बांटे जाएंगे और ₹25 लाख इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के खर्च के रूप में इस्तेमाल होंगे. उदाहरण के लिए, LIC हाउसिंग फाइनेंस का अकेले का दावा ₹1,322.39 करोड़ का था, लेकिन इस प्लान के तहत उन्हें सिर्फ ₹38.09 लाख मिलेंगे, जो उनके कुल दावे का महज 0.028% है.

कोर्ट ने क्यों दी मंजूरी?

बैंकों के कड़े विरोध के बावजूद NCLT ने इस प्लान को हरी झंडी देने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए

बहुमत का फैसला: कानून के मुताबिक, कर्ज समाधान के लिए लेनदारों की सहमति जरूरी होती है. विरोध करने वाले बैंकों के पास केवल 20% से कम वोटिंग राइट्स थे, जबकि सुभाष चंद्रा के इस रीपेमेंट प्लान को 80.81% वोटिंग शेयर का भारी समर्थन हासिल था.

संपत्ति की कमी: 144 पन्नों के अपने आदेश में जज नीलेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी (रेज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल) की रिपोर्ट के अनुसार, सुभाष चंद्रा के पास मौजूद निजी संपत्तियों की कीमत इस रीपेमेंट प्लान में दी जा रही रकम से भी बहुत कम है. ऐसे में अगर इस प्लान को खारिज भी कर दिया जाता, तो भी विरोध करने वाले बैंकों को कोई बड़ी रकम मिलने की उम्मीद नहीं थी.

सभी बैंकों पर लागू होगा फैसला

NCLT ने साफ किया है कि उसका काम बैंकों के व्यावसायिक फैसलों में दखल देना नहीं, बल्कि कानूनी निगरानी करना है. IBC की धारा 115 के तहत, एक बार प्लान मंजूर होने के बाद यह उन सभी बैंकों पर भी पूरी तरह लागू होगा जिन्होंने इसके खिलाफ वोट किया था. अब यह मामला अंतिम औपचारिक आदेश के लिए वापस मूल दो सदस्यीय बेंच के पास जाएगा.

खबर सुनते ही विजय माल्या का फूटा गुस्सा

इस हैरान करने वाले समझौते पर भारत से भागे कारोबारी विजय माल्या ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तंज कसा है. माल्या ने ट्वीट करते हुए लिखा

"अगर यह खबर सच है, तो मेरे दोस्त सुभाष को बहुत-बहुत बधाई. बैंकों और सरकार ने खुद माना है कि उन्होंने मुझसे 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं. वहीं दूसरी तरफ कई बड़े कर्जदारों का मामला महज कुछ रुपयों में रफा-दफा हो जाता है. मुझे लगता है कि भारत में कर्ज के इंसाफ का यही नया तरीका है. अब इस पर मीडिया कोई सवाल नहीं उठाएगा."

बता दें कि विजय माल्या साल 2016 में किंगफिशर एयरलाइंस का लोन न चुकाने के बाद भारत छोड़कर लंदन भाग गए थे, जहां से भारत सरकार आज भी उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस महासचिव ने साधा निशाना

कांग्रेस ने सुभाष चंद्रा के मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मंजूर पुनर्भुगतान योजना को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये मिलना ‘‘सिर्फ हेयरकट नहीं, बल्कि मुंडन’’ है और इससे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 का मजाक बनता है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वित्तीय शब्दावली में जब लेनदारों को बकाया रकम का केवल एक हिस्सा मिलता है तो अंतर को प्रतिशत के रूप में ‘हेयरकट’ कहा जाता है.

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने अभी एक जाने-माने कारोबारी की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे.’’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘यह सिर्फ हेयरकट नहीं है. यह वास्तव में मुंडन है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का पूरा मजाक बनाता है.’’

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