जमात-ए-इस्लामी फंडिंग मामला: एनआईए अदालत ने मुश्ताक अहमद मीर को भगोड़ा घोषित किया
जम्मू। जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में राजौरी निवासी मुश्ताक अहमद मीर को भगोड़ा घोषित कर दिया है। यह मामला अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट के माध्यम से प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के लिए कथित तौर पर धन जुटाने और उसका इस्तेमाल करने से जुड़ा है। मुश्ताक के पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में होने की आशंका जताई गई है।
विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 84 के तहत एनआईए की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत के अनुसार, मुश्ताक के खिलाफ पहले गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे, लेकिन वह न तो गिरफ्तार हुआ और न ही अदालत में पेश हुआ। उसे पेश होने के लिए नोटिस प्रकाशित कराने सहित कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाने के बावजूद उसकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी।
मुश्ताक अहमद मीर राजौरी जिले की दरहाल तहसील के थानामंग गांव का निवासी है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह 1995-96 में नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवाद से जुड़ने के लिए गया था और उसके पाकिस्तान तथा पीओके में सक्रिय होने की आशंका है।
एनआईए का यह मामला वर्ष 2022 में दर्ज किया गया था। आरोप है कि फरवरी 2019 में जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी संगठन घोषित किए जाने के बाद भी अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट के माध्यम से उसके लिए धन जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किया गया। अगस्त 2025 में विशेष एनआईए अदालत ने इस मामले में मुश्ताक अहमद मीर, ट्रस्ट और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
मुश्ताक की गिरफ्तारी की निकट भविष्य में संभावना नहीं दिखने पर अदालत ने एनआईए का आवेदन स्वीकार करते हुए उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
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