दुर्लभ संयोग में मनाए गए हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में इस वर्ष धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग देखने को मिला, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का महापर्व एक ही दिन अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों बाद बने इस तृतीया युक्त चतुर्थी के विशेष योग ने पर्व की धार्मिक महत्ता को कई गुना बढ़ा दिया। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार, जब हरतालिका व्रत तृतीया तिथि के साथ चतुर्थी का स्पर्श करता है, तो इसे अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना जाता है।
इस दुर्लभ योग के कारण शहरभर में सुबह से ही दोहरे उल्लास का वातावरण बना रहा। दोपहर के समय श्रद्धालुओं ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अपने-अपने घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और भव्य सार्वजनिक पांडालों में प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। जय गणेश देवा और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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