सीआरपीएफ में सूबेदार मेजर का पद बहाल करने की मांग, लांस नायक और नायक रैंक पर भी मंथन
नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में लांस नायक और नायक के पदों को दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव के बीच अब सूबेदार मेजर का पद बहाल करने की मांग भी उठी है। पूर्व अर्धसैनिक बल कर्मियों के संगठन ‘अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन’ ने इस संबंध में सीआरपीएफ महानिदेशक को पत्र भेजा है। संगठन का कहना है कि इससे वरिष्ठ कर्मियों की जिम्मेदारी और पद की गरिमा को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जा सकेगा।
संगठन के महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक, बल में जवानों के लिए समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि सिपाही को 20 साल की सेवा के बाद सब-इंस्पेक्टर और 25 साल की सेवा के बाद इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति देने की व्यवस्था पर विचार किया जाए। संगठन ने सूबेदार मेजर के पद को भी औपचारिक रूप से बहाल करने और वरिष्ठ इंस्पेक्टर को इस पद पर पदोन्नत करने की मांग की है।
इससे पहले सीआरपीएफ मुख्यालय ने लांस नायक और नायक के रैंक फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर जवानों से सुझाव मांगे थे। इन पदों को वर्ष 1997 में समाप्त कर सिपाही और हवलदार के रैंकों में समाहित कर दिया गया था। इसके बाद सिपाही से पहली पदोन्नति मिलने में लंबा समय लगने की समस्या सामने आती रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, पांच साल की सेवा के बाद लांस नायक, दस साल में नायक और 15 साल की सेवा के बाद हवलदार के पद तक पहुंचने का रास्ता तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
पूर्व अर्धसैनिक कर्मियों का कहना है कि केवल नए रैंक शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा। पदोन्नति के साथ वेतनमान, वित्तीय लाभ और सेवा संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि जवानों को वास्तविक लाभ मिल सके।
सीआरपीएफ में रैंक संरचना में बदलाव का उद्देश्य पदोन्नति के अवसर बढ़ाना, जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करना और जवानों के मनोबल को मजबूत करना है। सूबेदार मेजर के पद को बहाल करने की मांग पर अब बल के नेतृत्व की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित बदलावों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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