आतंकवाद के आरोपी अमेरिकी नागरिक की रिहाई पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, सरकार से मांगा जवाब
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोपों से जुड़े मामले में विदेश जाने की अनुमति मिलने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे एक विदेशी नागरिक को इतनी राहत क्यों दी गई, जबकि दूसरी ओर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने मामले में केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
जयराम रमेश ने 24 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वैनडाइक को चार महीने के लिए अमेरिका लौटने की अनुमति दी गई है। उन्होंने इसे कथित ‘वोट चोरी’ के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवा कार्यकर्ताओं की हिरासत से जोड़ते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। रमेश ने यह भी कहा कि वैनडाइक का मामला मई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान उठाया गया था और रुबियो हाल ही में फिर भारत आए थे।
कांग्रेस इससे पहले भी आरोप लगा चुकी है कि वैनडाइक के मामले में अमेरिकी अधिकारियों के दबाव की भूमिका हो सकती है। पार्टी ने सवाल किया है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत दर्ज मामले में बाद में दाखिल आरोपपत्र में आतंकवाद संबंधी प्रावधान क्यों शामिल नहीं किए। हालांकि, अमेरिकी दबाव के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से इस संबंध में किसी दबाव की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
एनआईए ने मार्च 2026 में वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि वे आवश्यक अनुमति के बिना पूर्वोत्तर भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचे और वहां जातीय सशस्त्र समूहों को हथियारों तथा ड्रोन युद्ध से संबंधित प्रशिक्षण दिया। एजेंसी ने मामले की शुरुआत यूएपीए सहित अन्य प्रावधानों के तहत की थी। ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
8 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में एनआईए ने आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 की धाराओं 21 और 23 का इस्तेमाल किया, जबकि यूएपीए के तहत कथित आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित जांच जारी रहने की बात कही। इसके बाद विशेष अदालत ने 18 सितंबर को वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी। अदालत के अनुसार, निर्धारित वैधानिक अवधि में संबंधित अपराधों की जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया था। डिफॉल्ट जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है, बल्कि कानून में तय समयसीमा के भीतर जांच पूरी नहीं होने पर मिलने वाली राहत है।
23 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष अदालत ने वैनडाइक को अमेरिका लौटने की अनुमति दी और छह यूक्रेनी नागरिकों को भी 24 फरवरी 2027 तक भारत से बाहर रहने की अनुमति बढ़ा दी। अदालत ने यह आदेश एनआईए की उस दलील के बाद दिया, जिसमें एजेंसी ने जांच के कुछ पहलुओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। एनआईए ने संकेत दिया है कि आगे जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।
कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा है कि विदेशी नागरिकों को आवश्यक अनुमति के बिना पूर्वोत्तर क्षेत्र में यात्रा करने और म्यांमार पहुंचने की कथित स्थिति कैसे बनी। पार्टी का कहना है कि मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं, जांच एजेंसी की ओर से जांच जारी होने की बात कही गई है।
फिलहाल वैनडाइक के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। अदालत से मिली जमानत और विदेश जाने की अनुमति को आरोपों से बरी होना नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की जांच और संभावित पूरक आरोपपत्र के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई तय होगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)