आंध्र प्रदेश में चुनावी हिंसा पर घमासान, नायडू और वाईएसआरसीपी आमने-सामने
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिंसा, उम्मीदवारों को रोकने और नामांकन पत्र छीनने के आरोपों ने राजनीतिक विवाद बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) एक-दूसरे पर चुनावी प्रक्रिया बाधित करने के आरोप लगा रही हैं। विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर हिंसा और अव्यवस्था फैलाकर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पुंगनूर, दारसी, कडप्पा, थंबल्लापल्ले और तिरुपति सहित कई क्षेत्रों में हुई घटनाओं का उल्लेख किया। टीडीपी ने भी निर्वाचन आयोग से हिंसा और उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के आरोपों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और पार्टी के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के समर्थकों ने उनके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका। पार्टी का दावा है कि कुछ स्थानों पर नामांकन पत्र छीने गए या फाड़े गए और पुलिस ने शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की। वाईएसआरसीपी ने राज्य सरकार, पुलिस और राज्य निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
राज्य पुलिस के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया के दौरान 13 जिलों में चुनाव से जुड़ी 31 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 22 घटनाएं हिंसा, झड़प या कानून-व्यवस्था बिगड़ने से संबंधित थीं, जबकि नौ मामलों में नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने की शिकायतें शामिल थीं। पुलिस ने बताया कि इन घटनाओं के संबंध में मामले दर्ज किए गए हैं और सीसीटीवी फुटेज, वीडियो तथा तस्वीरों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को उन उम्मीदवारों की शिकायतों पर विचार करने का निर्देश दिया, जिन्होंने कथित तौर पर धमकी या हिंसा के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने की बात कही थी। अदालत ने उम्मीदवारों की सुरक्षा, नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने को भी कहा। साथ ही, आयोग को शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया गया।
इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 100 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। आयोग को नामांकन संबंधी शिकायतों की समीक्षा कर आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेना है। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित करने की तारीख भी 25 अक्टूबर तक टालने का निर्देश दिया था। मामले पर आगे की सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
अब इस पूरे विवाद में अहम सवाल यह है कि क्या सभी दलों के उम्मीदवारों को बिना दबाव और बाधा के चुनाव लड़ने का समान अवसर मिलेगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और निर्वाचन आयोग की पारदर्शी कार्रवाई से ही चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)