मणिपुर में कुकी-जो कैंप पर सुरक्षा बलों का कब्जा, 14 कैंपों का होगा ऑडिट
मणिपुर में सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी जिले के सिनाई कैंप पर नियंत्रण कर लिया है। यह कैंप कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के उन निर्धारित शिविरों में शामिल है, जहां संघर्ष विराम व्यवस्था के तहत कैडरों को रखा जाना था। कैंप में दर्ज 159 कैडरों में से केवल एक व्यक्ति की पहचान पंजीकृत सदस्य के रूप में होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य के सभी 14 निर्धारित कैंपों का ऑडिट करने का फैसला किया है। इस कार्रवाई से केंद्र सरकार और कुकी-जो संगठनों के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने सिनाई कैंप में तलाशी और सत्यापन अभियान चलाया। इस दौरान 17 ऐसे लोग मिले, जिनकी पहचान समझौते के तहत पंजीकृत कैडरों के रूप में प्रमाणित नहीं हो सकी। सभी 17 लोगों को गिरफ्तार कर 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। मामले में कथित तौर पर गलत पहचान का इस्तेमाल करने, अनधिकृत रूप से हथियार रखने और कैंप के जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने 24 आग्नेयास्त्र, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक, वायरलेस संचार उपकरण और अन्य सामान बरामद किया। अधिकारियों के अनुसार, कैंप में दर्ज बाकी कैडरों की अनुपस्थिति के बारे में अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए गए हैं। कुछ के घर जाने और कुछ के दूसरी जगह होने की बात कही गई है। सुरक्षा एजेंसियां इन दावों की पुष्टि कर रही हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह अनियमितता केवल सिनाई कैंप तक सीमित है या दूसरे शिविरों में भी ऐसी स्थिति है।
यह कार्रवाई 19 अक्टूबर को इम्फाल पूर्वी जिले के खोंगबान सुनुरोक गांव के पास तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के बाद तेज किए गए सुरक्षा अभियान के बीच हुई है। पुलिस ने इस मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, उनमें से दो ने कथित तौर पर हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
विवाद के केंद्र में कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के साथ हुआ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) यानी अभियान स्थगन समझौता है। इस समझौते पर केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और संबंधित संगठनों ने 22 अगस्त 2008 को हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) के अंतर्गत आने वाले 25 संगठनों को शामिल किया गया था। समझौते का उद्देश्य हिंसा रोकना और राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत का रास्ता बनाए रखना था। इसके नियमों के अनुसार, संबंधित कैडरों को निर्धारित कैंपों में रहना, हिंसा से दूर रहना और हथियारों को तय सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखना होता है।
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने कहा है कि समझौते की अवधि 4 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई और इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि समझौते को औपचारिक रूप से समाप्त करने का निर्णय अलग विषय है। उनके अनुसार, इसके भविष्य पर केंद्र सरकार को फैसला करना है। तब तक निर्धारित कैंपों और हथियारों से जुड़ी व्यवस्था को लेकर स्थिति की जांच की जा रही है।
समझौते को लेकर मणिपुर में लंबे समय से मतभेद रहे हैं। फरवरी 2024 में राज्य विधानसभा ने इसे समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। मैतेई संगठनों और कुछ नगा समूहों ने भी समझौते की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इसके दायरे में आने वाले कुछ समूह हिंसा में शामिल रहे हैं। दूसरी ओर, इस व्यवस्था को बातचीत और संघर्ष विराम बनाए रखने के एक माध्यम के रूप में देखा जाता रहा है।
अब सभी 14 निर्धारित कैंपों के ऑडिट से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि पंजीकृत कैडरों की वास्तविक संख्या क्या है, नियमों का पालन किस हद तक हुआ और हथियारों की निगरानी व्यवस्था प्रभावी रही या नहीं। जांच के निष्कर्ष और केंद्र सरकार का अगला निर्णय तय करेंगे कि समझौते को नए सिरे से लागू करने, उसकी शर्तों में बदलाव करने या उसे समाप्त करने के संबंध में क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल समझौते के नवीनीकरण को लेकर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)