सीबीआई ने IL&FS कंपनी के खिलाफ दर्ज किया केस, 212.34 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने केनरा बैंक की शिकायत पर मुंबई स्थित आईएल एंड एफएस एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और उसके पूर्व प्रबंध निदेशकों व निदेशकों सहित अन्य लोगों के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले में बैंक को 212.34 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई ने 21 अक्टूबर को मामला दर्ज करने के बाद मुंबई, दिल्ली और नोएडा में कई ठिकानों पर तलाशी ली।
शिकायत के अनुसार, कंपनी ने तत्कालीन सिंडिकेट बैंक की मुंबई स्थित शाखा से 100 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था। इसके अलावा, बैंक की लंदन शाखा से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी पांच करोड़ डॉलर का ऋण भी प्राप्त किया गया था। आरोप है कि इन रकमों का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए ऋण मंजूर किए गए थे।
सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि ऋण की रकम को कंपनी की सहयोगी और संबंधित कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह भेजा गया। बैंक की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में भी धन के इस्तेमाल और लेन-देन से जुड़ी अनियमितताओं की बात सामने आई है। जांच एजेंसी को आशंका है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति को छिपाने के लिए वित्तीय विवरणों को भी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
मामले में कंपनी के साथ सुनील वाधवा, अनूप सेठ, हरि शंकरन, रमेश चंद्र बावा और अरुण कुमार साहा सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। प्राथमिकी में अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी सहित संबंधित कानूनों के तहत आरोप लगाए गए हैं।
तलाशी के दौरान सीबीआई ने बैंक से जुड़े दस्तावेज, जमा पर्चियां, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के कागजात, निदेशकों के बैंक खातों और संपत्तियों का विवरण तथा कंपनी के लेजर सहित कई दस्तावेज बरामद किए। एजेंसी अब कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम के अंतिम इस्तेमाल और मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।
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