बंगाल उपचुनाव: विपक्षी कैंपेन कवर करने वाले स्थानीय न्यूज पेजों पर फेसबुक की रोक, पत्रकारों ने उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से पहले मुर्शिदाबाद के कई स्थानीय पत्रकारों के फेसबुक न्यूज पेजों पर भारत में अस्थायी रोक लगाए जाने का मामला सामने आया है। प्रभावित पेजों के संचालकों का कहना है कि ये पेज मुख्य रूप से स्थानीय खबरों के साथ विपक्षी दलों के सीमित प्रचार और उनसे जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे थे। यह घटनाक्रम 6 अक्टूबर को हुए मतदान से पहले सामने आया, जिससे स्थानीय पत्रकारों के बीच सवाल उठे।
जिन पत्रकारों को नोटिस मिले, उनमें फेसबुक की ओर से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत कानूनी आवश्यकताओं का हवाला दिया गया है। नोटिस के अनुसार, संबंधित कंटेंट तक पहुंच को बार-बार प्रतिबंधित करना पड़ा और इसी आधार पर भारत में अकाउंट का एक्सेस सात दिनों के लिए अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि, नोटिस में किसी विशेष पुलिस कार्रवाई या शिकायत का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है।
ऑल्ट न्यूज ने ऐसे कम से कम 12 स्थानीय फेसबुक पेजों की पहचान की है, जिनमें ‘मुर्शिदाबाद ग्लोबल टाइम्स’, ‘हरिहरपारा टाइम्स बांग्ला’, ‘मुर्शिदाबाद टुडे’, ‘मुर्शिदाबाद शिरोनम’, ‘मुर्शिदाबाद न्यूज टाइम’, ‘रिपोर्टर प्रेस’, ‘एम न्यूज टीवी’, ‘बरतबाही न्यूज’, ‘हाई न्यूज’, ‘BNS न्यूज बांग्ला’, ‘AN बांग्ला न्यूज’ और ‘न्यूज फ्रंट डिजिटल’ शामिल हैं। इनमें ‘मुर्शिदाबाद टुडे’ चलाने वाले स्वपन कारीगर का पेज सबसे अधिक प्रभावित पेजों में बताया गया है, जिसके करीब 7.4 लाख फॉलोअर्स थे। कारीगर के मुताबिक, अकाउंट प्रतिबंधित होने से चुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम की रिपोर्टिंग प्रभावित हुई।
स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि उनके पेजों पर रोक ऐसे समय में लगी, जब रेजीनगर में विपक्षी दलों के अभियान और स्थानीय घटनाक्रम की रिपोर्टिंग हो रही थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि पेजों को विशेष रूप से विपक्षी कवरेज के कारण प्रतिबंधित किया गया। मेटा के नोटिस में कानूनी आवश्यकताओं का उल्लेख किया गया है, जबकि मुर्शिदाबाद पुलिस ने पेजों पर कार्रवाई में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। 6 अक्टूबर को मतदान के दौरान AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया और पुलिस की भूमिका को लेकर आरोप लगाए, जबकि इन आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए। उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं।

फेसबुक पेजों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर अब मुख्य सवाल यह है कि संबंधित कंटेंट के खिलाफ किस तरह की कानूनी शिकायत या प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की गई और क्या चुनावी अवधि में स्थानीय पत्रकारों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगी रोक का उनकी रिपोर्टिंग पर व्यापक प्रभाव पड़ा। मेटा से इस मामले में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि सभी प्रभावित पेजों के खिलाफ कार्रवाई का एक ही कारण था या अलग-अलग मामलों में अलग-अलग कानूनी अनुरोध किए गए थे।
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