यूपी में गैस सिलिंडर के लिए मारामारी, कई जिलों में बेकाबू हालात; जाम और प्रदर्शन की नौबत
लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश में रसोई गैस की किल्लत लगातार गहराती जा रही है, जिससे कई जिलों में हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी सिलिंडर नहीं मिलने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। कई जगहों पर उपभोक्ताओं और एजेंसी कर्मचारियों के बीच कहासुनी की स्थिति बन रही है, जबकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन और जाम तक लगाना पड़ा। इस संकट का असर अब उद्योग-धंधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रसोई गैस का संकट गहराता जा रहा है। प्रयागराज के झुंसी क्षेत्र में गैस की किल्लत को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा इतना बढ़ गया कि स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। हालात को देखते हुए कुछ देर के लिए गैस एजेंसी का कार्यालय भी बंद करना पड़ा।
शाहजहांपुर के जलालाबाद में भी सिलिंडर न मिलने से नाराज लोगों ने बरेली–फर्रुखाबाद हाईवे पर जाम लगा दिया। सुबह करीब दस बजे लगाए गए इस जाम से यातायात प्रभावित हो गया। हालांकि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। गोरखपुर के भरोहिया क्षेत्र में भी गैस संकट के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पीपीगंज स्थित एजेंसी सील होने के बाद गैस वितरण ठप हो गया, जिससे उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्रदर्शन किया।
घरेलू एलपीजी सिलिंडर के लिए गुरुवार को भी कई स्थानों पर मारामारी की स्थिति रही। गैस एजेंसियों के बाहर लोग घंटों लाइन में बैठे रहे। बुकिंग में दिक्कत आने से भी उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। गैस संकट का असर बाजार पर भी पड़ने लगा है और कई खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। दुकानों पर नई रेट लिस्ट लगाई जा रही है।
फिरोजाबाद में गैस संकट का सीधा असर कांच और चूड़ी उद्योग पर पड़ा है। औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली गैस के कोटे में करीब 20 प्रतिशत की कटौती के बाद कई कारखानों के बंद होने की नौबत आ गई है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो सैकड़ों कारखाने बंद हो सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में कामगार बेरोजगार हो जाएंगे।
हाथरस के बिसावर क्षेत्र में भी गैस आपूर्ति बाधित होने से चांदी के घुंघरू और आभूषण बनाने का कारोबार प्रभावित हुआ है। व्यावसायिक गैस सिलिंडर न मिलने से करीब 180 छोटी-बड़ी फैक्टरियों में काम बंद हो गया है, जिससे लगभग चार हजार कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। यहां पर्यावरण नियमों के कारण मशीनें गैस से ही चलती हैं, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों में भी गैस संकट गहरा गया है। वाराणसी के अन्नक्षेत्रों में गैस खत्म होने के कारण चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है और बड़े होटलों में भी चूल्हे लगाए जा रहे हैं। जौनपुर के जफराबाद क्षेत्र में छापेमारी के दौरान एक दुकान से 61 घरेलू गैस सिलिंडर बरामद किए गए, जबकि भदोही में भी कालाबाजारी की सूचना पर पूर्ति विभाग ने कई सिलिंडर जब्त किए हैं। मिर्जापुर में कुछ वितरकों के मोबाइल बंद बताए जा रहे हैं, जबकि आजमगढ़, चंदौली, सोनभद्र, गाजीपुर और बलिया में सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं।
प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि युद्ध से उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों पर सरकार की नजर है और प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को गैस या अन्य जरूरी ईंधन की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि रसोई गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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