महापौर की अनुपस्थिति में शासन के आदेश पर बोर्ड बैठक कराने की तैयारी में पार्षद
नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा 31 अक्टूबर तक नहीं सुलझा तो 1 नवंबर से होने वाली हड़ताल के गंभीर परिणाम यहां के वाशिंदों के साथ- साथ प्रकाशपर्व दीपावली पर दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को भी भुगतने पड़ सकते हैं। यमद्वितीय जैसे पर्व पर जहां दूर-दूर से भाई- बहिन यमुना स्नान के लिये आते हैं, अगर हड़ताल हुयी तो दीपावली जैसे त्यौहार की रंगत हल्की पड़ जायेगी, वहीं ब्रज चौरासी कोस के परिक्रमार्थियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
मथुरा। पिछले छह माह से नगर निगम की बोर्ड बैठक न होने के कारण जहां वित्तीय मामलों से जुड़े विकास कार्य अधर में लटके हैं वहीं मूल रूप से 540 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा भी शहरवासियों के लिये मुसीबत बना हुआ है, जिसको निपटाने के लिये नगर निगम के पार्षद वैकल्पिक तौर पर शासन की अनुमति से बोर्ड बैठक बुलाने की तैयारी में जुटे हैं। यदि 20 अक्टूबर तक बोर्ड बैठक नहीं होती है तो 1 नवंबर से सफाई कर्मचारी पुनः हड़ताल पर जा सकते हैं। इसे लेकर निगम के अधिकारी चिंतित हैं।
बताया गया कि गत 15 अप्रैल की बोर्ड बैठक में 540 सफाई कर्मचारियों को डूडा से भर्ती किये जाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसे चूक कहें या सोची समझी चाल, इस प्रस्ताव पर महापौर के हस्ताक्षर नहीं हुये जिससे यह मामला अधर में लटका हुआ है। नियुक्तियों के नाम पर सफाई कर्मचारियों से 15 दिन तक मथुरा-वृन्दावन के विभिन्न वार्डों में सफाई कार्य भी कराया गया। सूत्र बताते हैं कि नियुक्ति की एवज में कुछ लोगों ने धन उगाही भी की लेकिन बाद में सफाईकर्मियों को यह कहकर टाल दिया गया कि नियुक्तियों पर रोक लग गयी है।
जबकि वास्तविकता यह थी कि इस प्रस्ताव पर महापौर की मुहर न लग पाने के कारण यह अधर में है और तब से अब तक बोर्ड बैठक नहीं हुयी है जिससे इस प्रस्ताव को स्वीकृत कराया जा सके। वास्तव में मथुरा वृन्दावन में सफाई कर्मचारियों की कमी के चलते नई नियुक्तियां किया जाना आवश्यक है। कई क्षेत्रों के पार्षदों की पहल पर यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा गया था जिसे लेकर बाद में सफाई कर्मचारी नेता महापौर से मिले भी, जिसमें उन्होने स्वीकार किया कि उनकी चूक के चलते इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं हो पाये।
जिससे तब से अब तक यह मामला अटका हुआ है। पिछले दिनों सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान नगर निगम आयुक्त द्वारा यह कहकर हड़ताल खुलवाई गयी है कि अगली बोर्ड बैठक जल्द ही बुलायी जायेगी और प्रस्ताव पास कराकर नियुक्तियों को हरी झण्डी दी जायेगी। सफाई कर्मचारी नेताओं का कहना है कि लगातार महापौर के नगर निगम न आने और बोर्ड बैठक न बुलाये जाने से अब यह मामला आगे नहीं टाला जा सकता।
20 अक्टूबर तक बोर्ड बैठक बुलाये जाने का आश्वासन नगर आयुक्त द्वारा दिया गया है लेकिन एक सप्ताह में ऐसा दिखाई नहीं देता कि महापौर बोर्ड बैठक बुलायेंगे। ऐसे में पार्षदों द्वारा वैकल्पिक तौर पर उनकी अनुपस्थिति में बोर्ड बैठक कराने के लिये शासन से अनुमति मांगी जा सकती है। यदि शासन से अनुमति मिलती है तो सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और नगर निगम के अन्य प्रस्तावित कामों को हरी झण्डी मिल पायेगी। अन्यथा की स्थिति में सफाई कर्मचारी यह तय कर चुके हैं कि यदि 27 अक्टूबर तक कर्मचारी हित में शुरूआत नहीं हुयी तो 1 नवंबर से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगी। इससे बिगड़ने वाले हालातों के लिये नगर निगम और प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।
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