गुना में आदिवासी भूमि पर प्लॉट बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक, एसडीएम शिवानी पाठक ने जारी किए आदेश

Tuesday, October 13, 2026 - 23:07
Updated: 4 hours ago
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गुना में आदिवासी भूमि पर प्लॉट बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक, एसडीएम शिवानी पाठक ने जारी किए आदेश

गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में आदिवासी भूमि पर कथित तौर पर बिना वैध अनुमति कॉलोनी विकसित करने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। ग्राम बोरखेड़ागिर्द, पंचायत पांज, तहसील गुना स्थित सर्वे नंबर 40/1 और 40/3 की भूमि पर प्लॉटों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शिवानी पाठक के आदेश के तहत की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकसित करने और निर्माण कार्य किए जाने को लेकर राजस्व विभाग ने आपत्ति जताई थी। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवाया गया। साथ ही तहसीलदार गुना को 31 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, सर्वे नंबर 40/1 की 0.797 हेक्टेयर और सर्वे नंबर 40/3 की 0.796 हेक्टेयर भूमि सुखवती पत्नी लीलाधर तेकाम, निवासी पिछोर, जिला शिवपुरी के नाम दर्ज बताई गई है। वहीं, बंदोबस्त रिकॉर्ड में संबंधित भूमि का संबंध गंगोला पुत्र रतना, जो शहरिया जनजाति से बताए गए हैं, के नाम से दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इन अभिलेखों और भूमि के स्वामित्व से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

मामले में मुख्य सवाल भूमि के हस्तांतरण, आवासीय प्रयोजन के लिए व्यपवर्तन और कॉलोनी विकास की वैध अनुमति को लेकर हैं। मध्य प्रदेश में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजाति की भूमि के गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण पर निर्धारित प्रतिबंध और अनुमति संबंधी शर्तें लागू होती हैं। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित लेनदेन की वैधता जांच के दायरे में आ सकती है।

प्रशासन की ओर से संबंधित उप-पंजीयक को भी सर्वे नंबर 40/1 और 40/3 की भूमि से जुड़े प्लॉटों के विक्रय पत्रों का पंजीयन नहीं करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। इस कदम का उद्देश्य विवादित भूमि पर आगे की खरीद-फरोख्त रोकना और संभावित खरीदारों को विवाद में फंसने से बचाना बताया जा रहा है।

इस प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों और सरकारी कर्मचारियों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता अभी जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही स्थापित की जा सकती है। यदि अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों या पंजीयन विभाग के कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

प्रशासनिक रोक के मद्देनजर नागरिकों से अपील है कि संबंधित सर्वे नंबरों की भूमि पर प्लॉट खरीदने से पहले सरकारी रिकॉर्ड, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व और आवश्यक अनुमतियों की जांच अवश्य करें। मामले में आदेश की प्रमाणित प्रति, राजस्व अभिलेख और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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