स्वीकृति मिली, आदेश जारी… फिर पटरियों पर क्यों नहीं दौड़ी “लाइफलाइन” मेमू? क्षेत्रीय जनता में बढ़ा आक्रोश
गुना (आरएनआई) बीना–गुना–रुठियाई रेलखंड की जीवनरेखा मानी जाने वाली गाड़ी संख्या 61611/12 बीना–गुना–रुठियाई मेमू को कोरोना काल के बाद क्षेत्रीय जनता की मांग और संघर्ष के चलते पुनः प्रारंभ तो कर दिया गया, माननीय क्षेत्रीय सांसद जी की अनुशंसा पर ,लेकिन जिस उद्देश्य और सुविधा के लिए यह गाड़ी चलाई गई थी, वह आज भी अधूरी पड़ी है।
यह वही “लाइफलाइन” ट्रेन है जिसने वर्षों तक गांव, कस्बों और छोटे शहरों को जोड़ते हुए छात्रों, मजदूरों, किसानों, छोटे व्यापारियों और अपडाउन करने वाले हजारों यात्रियों की जिंदगी आसान बनाई थी। पहले यह मेमू चार फेरे लगाती थी, जिससे सुबह काम पर निकलने वाला यात्री शाम तक सुरक्षित अपने घर लौट आता था।
लेकिन कोरोना के बाद लाइफलाइन की जगह मेमू गाडी को पुनः प्रारंभ किया गया तो तत्कालीन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इसके चार फेरों की जगह केवल दो फेरे कर दिए गए। तभी से क्षेत्रीय जनता लगातार संघर्ष कर रही थी। यात्री सेवा संगठनों ने ज्ञापन दिए, रेल अधिकारियों से मुलाकात की, रेल क्षेत्रीय परामर्शदात्री समिति में मुद्दा उठाया गया, सांसदों से लेकर रेल मंत्री तक को लगातार अवगत कराया गया।
अंततः 15 अप्रैल 2026 को रेल प्रशासन द्वारा इस मेमू के पुनः चार फेरे चलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। यह समाचार सुनते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों को लगा कि अब अनावश्यक डीजल-पेट्रोल की बर्बादी रुकेगी, यात्रियों को सुरक्षित और सस्ती यात्रा मिलेगी तथा आम आदमी को राहत मिलेगी।
लेकिन विडंबना देखिए — स्वीकृति मिले आज पूरा एक माह होने जा रहा है, फिर भी पटरियों पर चार फेरों का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
क्षेत्रीय जनता अब सवाल पूछ रही है —
“जब ट्रेन पहले से चल रही है, पटरी तैयार है, रैक उपलब्ध है, तो आखिर संचालन में देरी क्यों? यह कोई नई ट्रेन तो नहीं जिसे वर्षों की प्रक्रिया चाहिए, केवल फेरों की संख्या ही तो बढ़ानी है!”
यात्री सेवा संगठन के संयोजक सुनील आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि हजारों यात्रियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जिस ट्रेन को क्षेत्र की “लाइफलाइन” कहा जाता है, उसी को लेकर उदासीनता समझ से परे है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की अपील कर चुके हैं, ताकि पेट्रोल-डीजल की बचत हो और पर्यावरण संरक्षण हो सके। ऐसे में यदि यह मेमू रात 8:40 बजे रुठियाई से अंतिम फेरा लेकर चलती है, तो इंदौर–कोटा ट्रेन से आने वाले सैकड़ों यात्रियों को लाभ मिलेगा और प्रतिदिन हजारों रुपये का ईंधन बचाया जा सकेगा।
वर्तमान स्थिति यह है कि रात 8:20 बजे 22984 इंदौर–कोटा एक्सप्रेस के रुठियाई पहुंचने के बाद गुना, अशोकनगर, मुंगावली और बीना की ओर जाने के लिए कोई बस या ट्रेन उपलब्ध नहीं रहती। मजबूर होकर यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
क्षेत्रीय जनता अब आक्रोशित स्वर में कह रही है कि जब स्वीकृति मिल चुकी है तो संचालन क्यों नहीं? आखिर रेल प्रशासन किस “अदृश्य आदेश” या “संकेत” का इंतजार कर रहा है?
जनता की मांग साफ है —
61611/12 मेमू के चारों फेरों का संचालन तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किया जाए, ताकि क्षेत्र की वास्तविक लाइफलाइन फिर से जनता के जीवन में गति भर सके।
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