बीसीसीआई से यूपीसीए में सुधार की तत्काल मांग: खेल की गरिमा बचाने के लिए प्रदीप सिंह का बड़ा कदम
लखनऊ (आरएनआई) उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के शासन और संचालन को लेकर एक अत्यंत गंभीर कानूनी चुनौती सामने आई है । अलीगढ़ निवासी प्रदीप सिंह ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को एक औपचारिक पत्र लिखकर यूपीसीए की संबद्धता को तुरंत निलंबित करने और वहां एक स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त करने की पुरजोर मांग की है । यह कदम इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 23 फरवरी 2026 को दिए गए एक विस्तृत आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें संघ के कामकाज में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है ।
न्यायालय द्वारा संज्ञान में लिए गए मुख्य विषय
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया है:
संपत्तियों का अवैध हस्तांतरण याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान यूपीसीए (एक कंपनी) ने भंग हो चुकी "द उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन" (एक सोसायटी) की संपत्तियों और बैंक खातों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है । आरोप है कि यह हेरफेर केवल नाम से "The" शब्द हटाकर अधिकारियों को गुमराह करने के लिए किया गया, जबकि कानूनन ये संपत्तियां उत्तर प्रदेश सरकार की होनी चाहिए ।
90 करोड़ रुपये का वित्तीय संकट न्यायालय ने पाया कि यूपीसीए पर लगभग 90.72 करोड़ रुपये की भारी कर चोरी का बकाया है, जिसे सार्वजनिक धन की बड़ी क्षति माना जा रहा है ।
अधिकारियों पर आपराधिक मामले यह भी संज्ञान में आया है कि यूपीसीए के सचिव और सीईओ सहित प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश (धारा 420 और 120B) के तहत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है ।
लोढ़ा सुधारों की अवहेलना पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राजीव शुक्ला सहित कई पदाधिकारी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कार्यकाल सीमा और पात्रता मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पदों पर बने हुए हैं ।
प्रदीप सिंह ने बीसीसीआई से अपील की है कि वह अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए यूपीसीए के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे । उन्होंने मांग की है कि एक स्वतंत्र एजेंसी से **फोरेंसिक ऑडिट** कराया जाए ताकि 90 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और संपत्तियों के अवैध उपयोग की सच्चाई सामने आ सके ।
उनका मानना है कि यदि बीसीसीआई इस समय चुप रहता है, तो यह न्यायपालिका के आदेशों और क्रिकेट की निष्पक्षता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करेगा । फिलहाल, उच्च न्यायालय ने यूपीसीए को किसी भी अचल संपत्ति को बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया है और मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होनी तय है ।
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