बाहुबली धाम में आदिवासी जमीन घोटाले का आरोप, कलेक्ट्रेट बाबू पर बेटे के नाम प्लॉट रजिस्ट्री कराने के गंभीर सवाल
गुना (आरएनआई) कलेक्ट्रेट कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा नमूना एबी रोड स्थित टोल नाके के पास 'बाहुबली धाम' कॉलोनी के मामले में देखने को मिला है। आदिवासी जमीनों की बंदरबांट और भू-माफियाओं से साठगांठ के लिए मशहूर कलेक्ट्रेट के 'संत' बाबू की संदिग्ध भूमिका एक बार फिर उजागर हुई है। चर्चा है कि संत बाबू ने *बाहुबली धाम कॉलोनी के आदिवासी की भूमि नंबरों को बचाने और फाइल को दबाने के एवज में कॉलोनाइजर से मोटा 'नजराना' वसूला है*। यह नजराना किसी नकदी के रूप में नहीं, बल्कि आदिवासी की जमीन पर अपने बेटे के नाम आलीशान भूखंड की रजिस्ट्री के रूप में लिया गया है।
*विकास अनुज्ञा निरस्त, पर भू-माफिया का कब्जा बरकरार*
मामला टोल नाके के पास ग्राम बोरखेड़ा गिर्द स्थित सर्वे क्रमांक 46 मिन 1/1, 46/1/2 और 46/2 का है। इस आदिवासी की भूमि पर काटी गई बाहुबली धाम कॉलोनी की विकास अनुज्ञा एसडीएम गुना द्वारा निरस्त की जा चुकी है। नियम के तहत:इस *भूमि को तत्काल प्रभाव से मूल स्वरूप में लौटाकर शासन के कब्जे में आना था*, लेकिन भू-माफिया की दादागिरी और कलेक्ट्रेट के रसूखदार बाबू के संरक्षण के चलते आज भी यहां निजी कब्जे बरकरार हैं। प्रशासन की नाक के नीचे आदिवासी की जमीन को खुर्द-बुर्द कर दिया गया और जिम्मेदार धृतराष्ट्र बने बैठे हैं।
*नजराने में ली आदिवासी की जमीन, बेटे के नाम हुई रजिस्ट्री*
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए कि जिस आदिवासी नंबर की भूमि की विकास अनुज्ञा निरस्त हुई, उसी में से भूखंड क्रमांक B-87-88 (1600 वर्ग फीट) सुधीर कुमार संत (कलेक्ट्रेट बाबू) ने अपने बेटे के नाम करवा ली। रजिस्ट्री नंबर mp13342022A1252498 इस काले कारनामे का पुख्ता सबूत है। सवाल यह उठता है कि जब प्रकरण कलेक्टर की निगरानी में है और शिकायतें लंबित हैं, तो भू-माफिया और कलेक्ट्रेट सिंडिकेट के गठबंधन के आगे प्रशासन इतना लाचार क्यों है?
क्या जिला प्रशासन इस रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर बाबू और कॉलोनाइजर पर नकेल कसेगा, या फिर 'संत' बाबू का सिंडिकेट कानून पर इसी तरह भारी पड़ता रहेगा *जिला प्रशासन का कानून का डंडा भूमाफिया के लिए नहीं बल्कि आमजन के लिए देखने को जयादा मिल रहा हे_?
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