ट्रंप का फैसला: पाकिस्तान दौरा रद्द कर दूतों को रोका, बोले- ईरान का प्रस्ताव ‘नाकाफी’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति वार्ता के लिए दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान की ओर से आया प्रस्ताव अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं था और उसे “पर्याप्त” नहीं माना जा सकता।
वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत के लिए कुछ पेशकश जरूर की थी, लेकिन वह अमेरिकी शर्तों के हिसाब से काफी नहीं थी। यह बयान उस सवाल के जवाब में आया, जिसमें पूछा गया था कि क्या ईरान ने समृद्ध यूरेनियम पर 20 साल तक रोक के अमेरिकी प्रस्ताव के बदले कोई ठोस पेशकश की थी।
ट्रंप ने पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कहा कि दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द करने के पीछे कई व्यावहारिक कारण भी थे। उन्होंने 18 घंटे की लंबी यात्रा को थकाऊ और महंगा बताते हुए खुद को “किफायती व्यक्ति” कहा और अनावश्यक खर्च से बचने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान की ओर से वार्ता के लिए कोई बड़ा या प्रभावशाली नेता सामने नहीं आ रहा था, ऐसे में अपने वरिष्ठ दूतों को भेजना उचित नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि उनके इस सख्त फैसले का तुरंत असर हुआ और यात्रा रद्द करने के महज 10 मिनट के भीतर ही ईरान की ओर से एक नया और बेहतर प्रस्ताव सामने आ गया। ट्रंप ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल इतना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके और अमेरिका इस मुद्दे पर मजबूत स्थिति में है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्होंने युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक ठोस योजना पेश की है। उन्होंने अमेरिका की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि वार्ता में बाधा दूसरी ओर से आ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, जहां इस्लामाबाद में बातचीत प्रस्तावित थी। हालांकि, ट्रंप के इस फैसले से शांति प्रयासों को झटका लगा है। अब आगे की बातचीत कब और किन शर्तों पर होगी, इस पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन अमेरिका ने संकेत दे दिए हैं कि वार्ता उसकी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगी।
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