दिल्ली में ग्रैप लागू होने के बाद ट्रैफिक पुलिस अलर्ट, सीमाओं पर बढ़ेगी निगरानी
नई दिल्ली। राजधानी में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होने के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, दूसरे राज्यों से दिल्ली होकर गुजरने वाले वाहनों को नियंत्रित करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश के बाद वापस मोड़ने से सीमावर्ती इलाकों में जाम लगने और प्रदूषण बढ़ने की समस्या सामने आती है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पड़ोसी राज्यों की पुलिस और संबंधित विभागों से सहयोग मांगा है।
इस संबंध में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पड़ोसी राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अधिकारियों के साथ अंतरराज्यीय समन्वय बैठक की। बैठक में तय किया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली अंतरराज्यीय और अंतरशहरी बसों को दिल्ली में प्रवेश करने के बाद लौटाने के बजाय सीमा पर ही रोककर दूसरे मार्गों की ओर भेजा जाए। अधिकारियों का मानना है कि इससे अनावश्यक यातायात दबाव और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
योजना के तहत दिल्ली की सीमाओं पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि वाहन चालकों को प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों की जानकारी मिल सके। जरूरत के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त प्रवर्तन दल भी तैनात किए जा सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित एजेंसियों के बीच त्वरित सूचना साझा करने के लिए एक समर्पित व्हाट्सऐप समूह बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे नियमों के पालन और कार्रवाई की निगरानी की जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि लागू दिशा-निर्देशों के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को ही संचालन की अनुमति होगी। साथ ही, एक नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में पंजीकृत नहीं होने वाले वाहनों के प्रवेश पर भी निर्धारित नियमों और अधिसूचित छूट के अनुसार प्रतिबंध लागू रहेंगे। वाहन चालकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) रखने की सलाह दी गई है।
ट्रैफिक पुलिस ने संबंधित विभागों को नो-एंट्री समय का सख्ती से पालन कराने, निर्धारित गंतव्य से इतर जाने वाले और ओवरलोड वाहनों की जांच करने तथा निर्माण सामग्री के परिवहन में नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे और सीमावर्ती क्षेत्रों में जाम की स्थिति न बने।
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