“कृष्णकाल से मोहनकाल तक” झांकी पर विवाद: गुना में प्रस्तुति को लेकर उठे सवाल
गुना (आरएनआई) गुना जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जेल विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई एक झांकी विवादों में घिर गई है। झांकी की थीम “कृष्णकाल से मोहनकाल तक” रखी गई थी, लेकिन इसमें कथित रूप से एक जीवित युवक को फांसी के फंदे पर लटकते हुए दिखाया गया, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई है।
कार्यक्रम में मौजूद कई दर्शकों ने इस दृश्य को असंवेदनशील और अनुचित बताया। उनका कहना है कि सांस्कृतिक या ऐतिहासिक प्रतीकों के माध्यम से संदेश देने की कोशिश समझी जा सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति को फांसी पर लटकते हुए प्रदर्शित करना न केवल अमानवीय प्रतीत होता है, बल्कि यह बच्चों और आम नागरिकों के बीच गलत संदेश भी दे सकता है।
झांकी के साथ दी गई पंचलाइन “कृष्णकाल से मोहनकाल तक” को लेकर भी चर्चा छिड़ गई है। कुछ लोगों ने इसे प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति बताया, तो कई लोगों का मानना है कि इस तरह के राजनीतिक या वैचारिक संकेतों को सरकारी विभागों द्वारा सार्वजनिक मंच से प्रदर्शित करना मर्यादित और संतुलित होना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से इस मामले में स्पष्टता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि संवेदनशील विषयों को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाए जिससे समाज में असहजता या आक्रोश पैदा हो।
फिलहाल इस झांकी का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसके बाद बहस और तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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